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मोर, किंगफिशर, उल्लू का रेस्क्यू: गर्मी में परिंदे भी हुए हलकान, वाइल्डलाइफ एसएसओ ने बचाई 80 पक्षियों की जान

Thu, 07 Jul 2022 02:38 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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किंगफिशर, मोर और उल्लू - फोटो : Wildlife SOS
आगरा और दिल्ली जैसे शहरों में चील जैसे शिकारी पक्षी अक्सर तेज धूप में अधिक ऊंचाई पर उड़ने के कारण डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के शिकार हो जाते हैं। हाल ही में आगरा के प्रगतिपुरम में एक घर से चील को बचाया गया, क्योंकि वह डिहाइड्रेशन के कारण उड़ान भरने में असमर्थ थी। रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची, पक्षी को फिर से हाइड्रेट करने के लिए पानी दिया। चील को कुछ घंटों तक चिकित्सकीय देख-रेख में रखने के बाद वापस प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।

एनजीओ ने मई और जून के बीच 17 चील को सफलतापूर्वक बचाया। इसके अलावा दो महीनों में आगरा से बचाए गए 80 पक्षियों में 49 भारतीय मोर भी शामिल हैं। जंगलों पर हो रहे अतिक्रमण के कारण इन मोरों का आबादी वाले इलाकों में दिखना एक आम बात हो गई है। इससे उन पर आवारा कुत्तों के हमले का खतरा बढ़ जाता है। मथुरा के गांव जुनसुती में एक मोर बिजली के खंभे से नीचे गिर गया था, जिसके बाद आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला बोल दिया। वाइल्डलाइफ एसएसओ रैपिड रिस्पांस यूनिट ने मोर को बचाया और उसके पंखों के नीचे आई चोटों का इलाज भी किया।
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किंगफिशर - फोटो : Wildlife SOS
आगरा में ताजमहल के पश्चिमी गेट के पीछे एक किंगफिशर चिड़िया को बचाया गया, जो घर के अंदर उड़कर पंखे से टकरा गई थी। परिवारजनों ने पक्षी को बेहोश अवस्था में पाया, जिन्होंने तुरंत वाइल्डलाइफ एसओएस को फोन किया। पक्षी को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी। उसे एक दिन निगरानी में रखा गया था।

आगरा के ही आजाद नगर में दीवार से टकरा कर घायल हुए बार्न आउल (उल्लू) को भी बचाया। उसके दाहिने पंख में आई चोट का इलाज किया गया। पंचकुइयां से एक इंडियन ईगल आउल का भी रेस्क्यू किया गया। सभी पक्षियों को सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया है।
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मोर का किया सफल रेस्क्यू - फोटो : Wildlife SOS
संस्था का कहना है कि तेजी से बढ़ रहे शहरीकरण का मतलब यह भी है कि अधिक इमारतें और घर जो कभी वन भूमि हुआ करते थे, आज पक्षियों की आबादी के लिए एक खतरा बन चुके हैं, जिसके कारण कई पक्षी दीवारों, खिड़कियों और इमारत के शीशे से टकराते हैं। पक्षी हवा में तेज गति से दीवारों से टकराते हैं, जिससे वे अक्सर बेहोश हो जाते हैं, उन्हें गंभीर चोटें भी आती हैं। यहां तक कि उनकी हड्डी फ्रैक्चर भी हो जाती है।

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चील की बचाई जान - फोटो : Wildlife SOS
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एमवी ने कहा कि पक्षी, विशेष रूप से किशोर, गर्मी से या थके होने पर आराम करने के लिए जमीन पर उतरते हैं। उस वक्त उड़ान भरने में असमर्थ यह पक्षी अक्सर जमीन पर कुत्तों या बंदरों के हमले से घायल हो जाते हैं, जो कभी-कभी घातक भी हो सकता है।
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वाइल्डलाइफ एसओएस ने बचाई उल्लू की जान - फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि आसमान में उड़ने वाले यह पक्षी स्वतंत्रता का प्रतीक हैं। तेजी से बढ़ रही गर्मी और शहरी अतिक्रमण के कारण पृथ्वी पर जीवन इनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण बन गया है। हमारी टीम ऐसे ही पक्षियों की सहायता के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है।
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