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नुकीली जंजीरों से 'जय' को मिली आजादी, हाथी अस्पताल में होगा इलाज, दर्दनाक है इसकी कहानी

Wed, 16 Dec 2020 12:06 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा
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मथुरा के हाथी अस्पताल में जय नाम का हाथी - फोटो : Wildlife SOS
'जय' 50 साल का हाथी है। उसके पैरों में नुकीली जंजीरों में डालकर भीख मांगने को हजारों मील चलने के लिए मजबूर किया जाता था। राजस्थान वन विभाग ने उसे यातनाओं से मुक्त कराया है। पैरों में नुकीली जंजीरों के कारण उसे गहरी और गंभीर चोटें आई हैं, जिसके उपचार के लिए हाथी को चिकित्सकीय देखभाल के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस को सौंप दिया गया है। मंगलवार को मथुरा के फरह स्थित हाथी अस्पताल में उसे लाया गया। 
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हाथी के पैरों में हैं गहरे जख्म - फोटो : Wildlife SOS
वाइल्डलाइफ एसओएस को राजस्थान वन विभाग ने 50 साल के हाथी के बारे में अवगत कराया गया था। हाथी के पीछे के पैरों में नुकीली जंजीरें बंधी होने के कारण उसके पैरों के घाव इतने बढ़ चुके थे कि उसे तत्काल उपचार की आवश्यकता थी। 'जय' नाम के हाथी को पंजाब, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक की लंबी दूरी चलने के लिए मजबूर किया जाता था। 
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घायल हाथी - फोटो : Wildlife SOS
वर्षों की क्रूरता की वजह से हाथी के पैरों में पैदा हुए दर्दनाक संक्रमित घावों ने उसकी स्वास्थ्य स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रारंभिक मेडिकल परिक्षण से पता चला कि हाथी बाएं आंख में आंशिक रूप से दृष्टिहीन है। वह ऑस्टियोआर्थराइटिस से भी पीड़ित है, और दर्द और सूजन के कारण उसके पैर भयानक स्थिति में हैं।

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मथुरा के हाथी अस्पताल में जय नाम का हाथी - फोटो : Wildlife SOS
राजस्थान और उत्तर प्रदेश के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन ने मथुरा स्थित हाथी अस्पताल में उसे लाने के लिए लिखित अनुमति जारी की। इसके बाद वाइल्डलाइफ एसओएस में हाथियों की देखभाल करने वाली विशेषज्ञों की टीम विशेष एंबुलेंस से घायल हाथी को राजस्थान से अस्पताल लेकर आई। मथुरा के डीएफओ रघुनाथ मिश्रा ने कहा कि राजस्थान वन विभाग ने इस हाथी को चिकित्सा देखभाल के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी अस्पताल भेजने का अनुरोध किया था, जिसकी अनुमति उत्तर प्रदेश वन विभाग ने दे दी। इससे हाथी का उचित उपचार और देखभाल हो सके।
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हाथी अस्पताल में 'जय' - फोटो : Wildlife SOS
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि हाथी के पैरों में गहरी उभरी हुई नुकीली जंजीरों को देखना एक भयानक दृश्य था। एक भीख मांगने वाले हाथी का जीवन दर्द से भरा होता है। वे गंभीर मानसिक तनाव बर्दाश्त करता हैं, जिसे ठीक होने में वर्षों लग जाते हैं। अब जब जय हाथी अस्पताल में सुरक्षित रूप से आ गया है, हमारी टीम उसकी विशेष देखभाल करेगी। उसे वह जीवन मिले जिसका वह हकदार है। 
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हाथी के जख्म का उपचार करते चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस के पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. राहुल प्रसाद ने बताया कि जय हाथी कुपोषित है और ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित है। बढ़े हुए नाखून और कटे-फटे पैरों ने उसकी सेहत को अत्यधिक प्रभावित किया है। हमारी टीम ने उसका उपचार शुरू कर दिया है। संस्था के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी ने कहा कि वाइल्डलाइफ एसओएस टीम के अनुभवी पशु-चिकित्सक और कर्मचारी जय की चिकित्सा प्रगति की बारीकी से निगरानी करेंगे।
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हाथी अस्पताल में 'जय' - फोटो : Wildlife SOS
मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एसओएस का हाथी अस्पताल, उत्तर प्रदेश वन विभाग के समर्थन से स्थापित किया गया था। नवंबर 2018 में हाथी अस्पताल की स्थापना हुई जहां घायल, बीमार और बूढ़े हाथियों के लिए विशेष चिकित्सा उपचार प्रदान किया जाता है। अस्पताल में वायरलेस डिजिटल एक्स-रे, लेज़र थेरेपी, डेंटल एक्स-रे, थर्मल इमेजिंग, अल्ट्रासोनोग्राफी, हाइड्रोथेरेपी जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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