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उत्तराखंड आपदा का असर: आगरा में जलकल ने दी सलाह- जब भी पानी आए भरकर रख लें

Thu, 18 Feb 2021 11:14 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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उत्तराखंड में आपदा के बाद गंगाजल में आ रही सिल्ट - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के तपोवन में ग्लेशियर टूटने का असर आगरा में पानी की आपूर्ति पर भी पड़ा है। गंगाजल में सिल्ट बढ़ जाने के कारण सिकंदरा और जीवनी मंडी वाटरवर्क्स गुरुवार से आधी क्षमता के साथ ही चलाए जाएंगे। इससे लोगों को सामान्य दिनों के मुकाबले आधा ही गंगाजल मिलेगा। इससे पानी की आपूर्ति का समय घट जाएगा। ऐसे में जल निगम ने लोगों को सलाह दी है कि जब भी पानी मिले, भंडारण कर लें। यह संकट अगले दो से तीन दिन बना रह सकता है।
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सिल्ट की वजह से गंगाजल हुआ मटमैला - फोटो : अमर उजाला
आगरा को गंगाजल बुलंदशहर से पालड़ा फॉल से पाइपलाइन के जरिए मिलता है। इसमें सिल्ट ज्यादा होने से फिल्टर चोक होने का खतरा बढ़ गया। जलकल और जलनिगम के अफसरों ने बुधवार को संयुक्त निरीक्षण के बाद तय किया कि गंगाजल के प्लांट आधी क्षमता के साथ चलाए जाएंगे। इससे जीवनी मंडी पर ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि यहां सप्लाई पूरी तरह से गंगाजल पर ही निर्भर है। आधे से ज्यादा शहर को गंगाजल की यहीं से सप्लाई होती है। सिकंदरा में यमुना जल भी मिलता है। यहां शोधन के लिए एमबीबीआर प्लांट की क्षमता बढ़ा दी जाएगी। गंगाजल की सप्लाई आधी ही रहेगी लेकिन यमुना जल की सप्लाई होगी। इससे यहां संकट कम होगा।
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टैंक में भरा गंगाजल - फोटो : अमर उजाला
शिकायत: सिल्ट से बदल गया पानी का रंग
पालड़ा से बुधवार सुबह तक पानी ठीक मिल रहा था, लेकिन दोपहर बाद पानी का रंग पूरी तरह से मटमैला हो गया। सिकंदरा में गंगाजल के 144 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट पर आपूर्ति कम दी जाएगी, जिससे पानी में आ रही मिट्टी पहले टैंक में बैठ जाए। उसके बाद पानी फिल्टर में जाए। यदि पूरा पानी देंगे तो मिट्टी को बैठने का स्थान नहीं मिलेगा।

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आगरा में पहले ऐसा आता था गंगाजल - फोटो : अमर उजाला
समस्या: जीवनी मंडी वाटरवर्क्स से जुड़े लोगों को ज्यादा परेशानी
सिकंदरा वाटरवर्क्स पर तो गंगाजल की मात्रा आधी करके यमुना जल का शोधन दोगुना कर दिया जाएगा। एमबीबीआर प्लांट को पूरी क्षमता से चलाया जाएगा। अभी तक 72 एमएलडी यमुना जल ही शोधित हो रहा था, पर अब 144 एमएलडी किया जाएगा। इससे यहां से पानी की आपूर्ति कम नहीं होगी, लेकिन जीवनी मंडी वाटरवर्क्स पर गंगाजल के 135 और 90 एमएलडी के प्लांट पर पानी की मात्रा कम की जाएगी। इसकी वजह से यहां पानी की शोधन कम हो पाएगा और लोगों को पानी कम मिलेगा।
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पानी की जांच के लिए वाटरवर्क्स पहुंची टीम - फोटो : अमर उजाला
समाधान: हर घंटे हो रही गंगाजल की गुणवत्ता की जांच
पालड़ा से मिले रहे गंगाजल में सिल्ट की मात्रा हर घंटे बढ़ रही है। इस वजह से लैब में गंगाजल की गुणवत्ता की जांच हर घंटे की जा रही है। सिल्ट की मात्रा पर नजर रखी जा रही है ताकि सिल्ट बढ़ने से फिल्टर पर असर न पड़े। पानी के शोधन के लिए एलम और क्लोरीन की मात्रा में इजाफा किया गया है। जीवनी मंडी प्लांट को फिलहाल आधी क्षमता से चलाया जा रहा है। सिल्ट के मुताबिक इसका संचालन किया जाएगा। जलनिगम के महाप्रबंधक पीयूष पंकज, प्रोजेक्ट मैनेजर आरके गुप्ता के साथ जीएम जलकल आरएस यादव इस निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे।
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सिल्ट की वजह से गंगाजल हुआ मटमैला - फोटो : अमर उजाला
'सिल्ट कम होने में दो से तीन दिन लग सकते हैं'
जलकल विभाग के महाप्रबंधक आरएस यादव ने बताया कि गंगाजल में उत्तराखंड से ही सिल्ट ज्यादा आ रही है। इसलिए जीवनी मंडी वाटरवर्क्स पर गंगाजल का शोधन कम किया जा रहा है। सिल्ट कम होने में दो से तीन दिन लग सकते हैं। पालड़ा से लगातार संपर्क में हम बने हुए हैं। 
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