पहाड़ की गोद में बसा जगनेर, जिसे आगरा का लातूर भी कहा जाता है। यहां ब्रिटिशकाल की ‘धरोहर’ में आसमान से बरसने वाला अमृत सहेजा जा रहा है। इससे साल के आठ महीने फसलों की सिंचाई होगी। 2500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले खेतों की प्यास बुझाई जाएगी। बारिश में यहां भूजल सतह पर आ जाता है।
इस क्षेत्र में ना कोई नहर है, ना ताल-तलैया, ना ही कोई नदी। करीब 100 साल पहले ब्रिटिश काल में जब आगरा के लिए नहर बनाई गईं, तभी यहां सिंचाई के लिए 44 से अधिक बांध-बंधियों का निर्माण हुआ। ये बांध-बंधियां अब जगनेर की धरोहर बन गई हैं। 44 में से 41 बांध-बंधियां संरक्षित हैं। शनिवार तक इनमें से 34 पानी से लबालब हो गईं। 1 से 10 फीट तक पानी भरा है। इन सभी बांध-बंधियों में करीब 4 करोड़ क्यूबिक फीट पानी इकठ्ठा होता है।