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दरवेश यादव हत्याकांड: परिजनों ने पुलिस पर उठाए सवाल, सीबीआई जांच की मांग

Sat, 22 Jun 2019 11:11 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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दरवेश यादव (फाइल) - फोटो : Facebook
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की पहली महिला अध्यक्ष दरवेश यादव की हत्या के मामले में उनके परिजन भी चाहते हैं कि जांच सीबीआई से कराई जाए। उन्होंने पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस उनके परिवार के सदस्यों से ही बार बार पूछताछ क्यों कर रही है? दूसरा, नामजद आरोपियों की अभी तक गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई है। उधर, अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गया है। 
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दरवेश यादव का फाइल फोटो - फोटो : social media
दरवेश के भतीजे पार्थ यादव ने कहा कि पुलिस हम लोगों से ही बार-बार सवाल जवाब कर रही है। वहीं दो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए न तो दबिश दी गई है और न ही कोई कार्रवाई हो रही है। उनका कहना है कि हमारे परिचित सतीश यादव को बार-बार पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है और आरोपियों को बख्शा जा रहा है। भतीजे सनी ने कहा कि मामले को दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। 
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घटना के चश्मदीद इंस्पेक्टर सतीश यादव - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन और पुलिस भी परिजनों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठा रही है। परिजनों ने सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग भी की है।दरवेश यादव हत्याकांड की जांच में चश्मदीद इंस्पेक्टर सतीश यादव के बयान के बाद फिर ब्रेक लग रहा है। पुलिस को आठ गवाहों के बयान दर्ज करने हैं। शुक्रवार को कोई बयान दर्ज नहीं किया गया। बयान के बाद ही जांच आगे चल पाएगी।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
दीवानी कचहरी में प्रैक्टिस करने वाली महिला वकील दरवेश यादव हत्याकांड के बाद से दहशत में हैं। उनका कहना है कि इस घटना से महिला अधिवक्ता दस साल पीछे पहुंच गई हैं। अधिवक्ता मंजू द्विवेदी ने कहा कि वो इस हत्याकांड से बुरी तरह टूट गई हूं, महिला आगे बढ़े, समाज को यह बर्दाश्त नहीं होता है। महिला अधिवक्ताओं को इस हत्याकांड से बहुत बड़ी क्षति हुई है, सभी भयभीत हैं। 
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हत्याकांड के बाद दहशत में महिला अधिवक्ता
अधिवक्ता श्रेष्ठा मिश्रा ने कहा कि हम महिला अधिवक्ताओं के लिए दरवेश ढाल की तरह थीं। किसी कार्यक्रम में महिलाओं को पीछे देख, दरवेश आगे बुला लेती थीं, महिलाओं को बोलने का साहस देती थीं, उनकी हत्या से महिला वकील दस साल पीछे पहुंच गई हैं। एडीजीसी मधु शर्मा ने कहा कि इस घटना के बाद से बड़ा डर लगने लगा है। वैसे भी कामकाजी महिलाओं के सामने तमाम चुनौतियां होती हैं। महिला वकीलों को परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ कानूनी जिम्मेदारी निभानी होती है।
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