एटा में आलम-ए-शोहरत की दरगाह शरीफ खानकाहे बरकातिया पर 94वें उर्स-ए-कासमी का आगाज शुक्रवार को हल्का-ए-जिक्र कादरिया के साथ हुआ। तीन दिन तक चलने वाले उर्स में देश-विदेश के हजारों जायरीन शिरकत करने पहुंचे। तकरीर में तालीम के साथ तरबियत (परवरिश) पर भी जोर दिया गया।
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उर्स-ए-कासमी का आगाज
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार सुबह खानकाहे बरकातिया दरगाह पर कुरानख्वानी हुईं। मजार-ए-मुबारक पर फातिहा पढ़ी गईं। महफिल-ए-मिलाद शरीफ में उलमा-ए-किराम ने इंसानियत और तालीम पर जोर दिया।
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उर्स में तकरीर देते मुस्लिम नेता
- फोटो : अमर उजाला
खानकाहे बरकातिया के सज्जादानशीं सैयद नजीब हैदर नूरी ने कहा कि मुस्लिम समाज में तालीम के गिरते स्तर को सुधारना होगा। हमें अपने बच्चों की तालीम के लिए फिक्रमंद होना पड़ेगा। हमें अपने बच्चों को दीनी तालीम के साथ आज के दौर में बुनियादी तालीम भी जरूर हासिल करानी चाहिए।
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उर्स में तकरीर देते मौलाना
- फोटो : अमर उजाला
जामिया अहसनुल बरकात में मदरसा तालीम के साथ आज के दौर की तालीम भी दी जाएगी। इस दौरान गद्दीनशीं प्रो. सैयद अमीन कादरी ने फातिहा और दुआ करके महफिल का समापन किया। सैयद मोहम्मद अशरफ कादरी, सैयद नजीब हैदर नूरी सहित बाहर से आए उलमा ने तालीम पर रोशनी डाली।
उर्स में देश की सबसे बड़ी अजमेर शरीफ स्थित सूफी संत ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह शरीफ, सुन्नी मसलक की खानकाह बरेली शरीफ के सज्जादानशीं, बदायूं शरीफ, काल्पी शरीफ, जाइस शरीफ, मैनपुरी आदि खानकाहों के सज्जादानशीं भी शामिल रहेंगे।