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तस्वीरें: यमुना का इतना भयानक रूप...47 साल पुराना टूटेगा रिकॉर्ड, 24 गांव जलमग्न, मंदिर तक जल समाधि में तब्दील

Thu, 11 Sep 2025 09:55 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के बाह में यमुना का राैद्र रूप देखने को मिल रहा है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। 60 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। हजारों लोग घर छोड़ सुरक्षित स्थानों की ओर जा चुके हैं। बाढ़ के चलते बटेश्वर के ब्रह्मलाल महाराज जल समाधि में हैं। मंदिर में गले की ऊंचाई तक पानी भरा है। 
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शिव मंदिर शृंखला - फोटो : संवाद
बाह के उटंगन नदी बाह के रीठई गांव पर यमुना में मिलती है। धौलपुर के पार्वती (आंगई) बांध के पानी की वजह से उटंगन नदी का बहाव तेज है। उटंगन के पानी के कारण बटेश्वर में बाढ़ का 47 साल पुराना रिकॉर्ड टूटने का खतरा पैदा हो गया है।

शिव मंदिर शृंखला के घाट पर यमुना की बाढ़ का तेजी से बढ़ रहा स्तर खतरे की आहट दे रहा है। मंदिर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी, राकेश वाजपेयी ने बताया कि भले ही आगरा और मथुरा में नदी का जलस्तर स्थिर हो। पर, बटेश्वर में बुधवार को भी तेजी से पानी बढ़ा है। बटेश्वर के चरन सिंह यादव, रामसिंह आजाद, डॉ. शिव सिंह वर्मा, जसवंत सिंह यादव, पुत्तूलाल आदि ने बताया कि बटेश्वर में बाढ़ का स्तर हर रोज बढ़ रहा है। बुधवार को भी कई बस्तियों और घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया। तेज बहाव डराने वाला है। 




 
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बाढ़ - फोटो : संवाद
बाढ़ का स्तर इसी तरह बढ़ा तो 1978 का रिकॉर्ड टूट सकता है। पुराने स्तर पर बाढ़ के पहुंचने के अंदेशे से गांव के लोग घबराए हुए हैं। उन्होंने बताया कि घाटों पर 6 फीट की ऊंचाई तक पानी भरा है। 1978 में मंदिर के शिखर डूबने से बचे थे। तीर्थ ही नहीं बटेश्वर से जुड़ने वाले बुढैरा, भौर, स्याइच, कलींजर, मोरहारी, शौरीपुर, टोका, कल्यानपुर, भरतार गांव बाढ़ से घिरे हैं।


 
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हर ओर पानी ही पानी - फोटो : संवाद
सड़कों पर 4 से 8 फीट तक पानी बह रहा है। बस्तियों में भी नदी डरावनी हो गई है। इधर तेज बहाव के मद्देनजर बटेश्वर पहुंचे डीसीपी पूर्वी सैय्यद अली अब्बास ने बाढ़ के हालात का जायजा लिया। बटेश्वर में बाढ़ क्षेत्र में लोगों को प्रवेश के लिए सड़क पर बेरीकेड आदि की व्यवस्था को देखा। बाढ़ प्रभावितों की मदद को पुलिस को अलर्ट किया। एसडीएम बाह संतोष कुमार शुक्ला ने बताया कि बटेश्वर क्षेत्र में रेस्क्यू आदि को लेकर एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया है।

 

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जलसमाधि में बटेश्वर के ब्रह्मलाल - फोटो : संवाद
जलसमाधि में बटेश्वर के ब्रह्मलाल
बाढ़ के चलते बटेश्वर के ब्रह्मलाल महाराज जल समाधि में हैं। मंदिर में गले की ऊंचाई तक पानी भरा है। मंदिर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी आदि तैरकर मंदिर पहुंचे और आरती की। मंदिर के बाहर 8 से 9 फीट गहराई तक पानी भरा है। जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि जलमग्न नंदी महाराज के 2 फीट ऊपर यमुना बह रही है। यहां पर चढ़ाए घंटों को नदी का पानी छूने लगा है। आरती और शृंगार पूजा के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए गये।


 
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तैरकर पहुंचे पुजारियों ने की आरती - फोटो : संवाद
तैरकर पहुंचे पुजारियों ने की आरती
मंदिर के प्रबंधक अजय भदौरिया ने बताया कि जब तक ब्रह्मलाल महाराज मंदिर में कालिंदी की तेज जल धारा रहेगी, तब तक मंदिर के पट बंद रहेंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से मंदिर में दर्शन पूजन के लिए न आने की अपील की है।

 
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यमुना - फोटो : संवाद
टापू से दिख रहे बाढ़ से घिरे बाह के 24 गांव, घर और खेत डूबे
 यमुना की बाढ़ में घिरे बाह के 24 गांव टापू जैसे दिखने लगे हैं। गलियां और खेतों में फसलें डूबी हैं। घरों में कंधे तक पानी भर गया है। झोपड़ियां तक बह गईं। बाढ़ से गांवों में हाहाकार मची हुई है, बेबस ग्रामीण किसान मदद की गुहार लगा रहे हैं।


 
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गांव में भरा पानी - फोटो : संवाद
रास्तों पर भरा पानी 
यमुना की बाढ़ में बुढैरा, स्याइच, मोरहारी, टोका, सुंसार, बड़ा पुरा, चरीथा, बाग गुडियाना, खिलावली, कटरा, पुरा दसू, प्रेम नगर, विक्रमपुर घाट, पई हार, कोट, पुरा रघुवर, नौगवां हार, पुरा चतुर्भुज, कचौरा घाट, कल्यानपुर, भरतार, गगनकी, रामपुर चंद्रसेनी, मई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। रास्तों पर 8 से 10 फीट तक पानी भरा हुआ है। गांव की गलियों के रास्ते घरों में पानी भर गया है। खाना बनाने और खाने के लिए छत पर पहुंच गए हैं।


 

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गांव में पानी - फोटो : संवाद
गृहस्थी का सामान नष्ट
कचौरा घाट के प्रधान वीरेंद्र सिंह, राजेंद्र, बबलू, प्यारेलाल, हीरालाल, पीतम सिंह, नवाब सिंह, भूरे सिंह, भीकम सिंह आदि ने बताया कि गृहस्थी का सामान नष्ट हो गया है। मवेशी पानी में बंधे हैं। अब तक कोई प्रशासनिक मदद नहीं मिली है। खिलावली, कटरा, पुरा दसू, लखीपुरा के गंगा सिंह, तुसीराम, बनवारीलाल, जनक सिंह, कमल सिंह, परिमाल सिंह, प्रभू दयाल, लाखन सिंह, मान सिंह, भोला, मोहर सिंह, राहुल ने बताया कि गांव की गलियों और घरों में पानी भर गया है। अब तक राहत के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है। बाढ़ ने घर और खेत चपेट में ले लिए हैं। 
 
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डूब गईं फसलें - फोटो : संवाद
डूब गई फसल
मई के नरेंद्र कुशवाह, रामरूप ने बताया कि 50 हजार रुपये बीघे की लागत पर रतालू की फसल की थी। पानी में डूब कर नष्ट हो गई है। रामलखन के गेंदा के फूल की खेती डूब गई है। कौशल, अर्जुन सिंह, सुखदेव ने बताया कि बाजरा, तिल, रतालू आदि की फसल नष्ट हो गई है। वहीं, बाढ़ में फंसे नौगवां हार, पुरा रघुवर के किशन, राजबहादुर, राम हंस, कल्यान, सुनमान, राजवीर, गंगाश्री, जयपाल, अरविंद, विजेंद्र, जवीर, कुंअरपाल, अमृत, रोशन, मोहन, भारत, बेनीराम, विनोद, श्याम, सुमित देवी, श्रीकिशन आदि रेस्क्यू तो कर लिए गए, लेकिन सामान डूब गए। लोगों का कहना है कि यमुना की बाढ़ से बाह के 40 गांवों में 3 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबे की फसलें डूबी हैं।
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