वन विभाग ने चंबल में कछुओं की निगरानी बढ़ा दी है। इसकी वजह है कछुओं की तस्करी रोकना। दरअसल, दिवाली पर कुछ अंधविश्वास में कछुओं का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा मांस और शक्तिवर्धक दवाओं के लिए भी बिहार, बंगाल के रास्ते बांग्लादेश और चीन तक कछुओं की तस्करी होती रही है। इसे रोकने के लिए वन विभाग की टीमों ने चंबल में पेट्रोलिंग बढ़ा गई है।
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चंबल नदी की रेत में अंडे से निकलते नन्हे कछुए (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
चंबल नदी में मगरमच्छ, घड़ियालों के साथ ही दुनिया से लुप्त हो रहीं कछुओं की आठ प्रजातियां भी मौजूद हैं। इनमें साल, धोढ़, धमोका, पचेड़ा, कटहवा, सुंदरी, बटागुर, चित्रा इंडिका संरक्षित हो रही हैं। इस साल जून में सात हजार से ज्यादा कछुए नदी में छोड़े गए थे।
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चंबल नदी में कछुए
- फोटो : अमर उजाला
दिवाली पर कुछ लोग अंधविश्वास के चक्कर में कछुओं का इस्तेमाल करते हैं। इसके कारण इनकी तस्करी बढ़ जाती है। शक्तिवर्धक दवाओं के लिए चीन तक चंबल से कछुओं की तस्करी हुई थी। ऐसे मामले बीते वर्षों में सामने आए।
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मैनपुरी में कई बार पकड़े जा चुके हैं कछुआ तस्कर
- फोटो : अमर उजाला
पिछले साल ही 26 अक्तूबर को 80 कछुओं समेत फतेहाबाद क्षेत्र से तस्कर पकड़े गए थे। जबकि 18 नवंबर 2018 में इटावा से मैनपुरी के करहल निवासी युवक गिरफ्तार हुए थे। इनके पास से 745 कछुएं बरामद हुए थे।
दिवाली से पहले कछुओं की तस्करी रोकने के लिए वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि चंबल क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग कर कछुओं समेत विभिन्न जलीय जीवों की निगरानी की जा रही है।