फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बारिश से धुली ताजनगरी में राहत महसूस कर रहे सैलानी, लेकिन अब भी ये खतरा

Thu, 07 Dec 2017 06:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
1 of 6
टू‌र‌िस्‍ट - फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी में जहरीली हवा फेफड़ों में पहुंचना बरकरार है लेकिन धूल कणों की संख्या में बारिश के कारण कुछ कमी आई है। इसका असर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बुधवार शाम चार बजे जारी किए गए एयर क्वालिटी इंडेक्स में नजर आया।
विज्ञापन

2 of 6
टू‌र‌िस्‍ट - फोटो : अमर उजाला
यह मंगलवार के 424 अंक के मुकाबले बुधवार को 347 अंक तक आ गया, लेकिन धूल कणों में मामूली कमी के साथ वातावरण में खतरनाक कार्बन मोनोक्साइड और नाइट्रोजन डाइक्साइड की कई गुना मात्रा बरकरार है, जो सांस लेने में न केवल परेशानी खड़ी कर रही है बल्कि लोगों के श्वसन तंत्र को भी प्रभावित कर बीमार बना रही है।
विज्ञापन

3 of 6
टू‌र‌िस्‍ट - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार शाम को शुरू हुई बारिश रात तक चली, लेकिन इसका ज्यादा असर धूल कणों पर नहीं पड़ा। पूरे दिन में केवल दो मिमी बारिश हुई, लेकिन धूल कण उस अनुपात में कमी नहीं हो पाए। नेशनल हाईवे पर हो रही खोदाई और निर्माण कार्य के कारण धूल कणों की संख्या में कमी नहीं आ सकी।

4 of 6
टू‌र‌िस्‍ट - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जो आंकड़े बुधवार शाम को जारी किए गए, उनमें कानपुर सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में पहले नंबर पर रहा तो आगरा चौथे स्थान पर रहा। देश के सबसे प्रदूषित दस शहरों में से सात उत्तर प्रदेश के हैं। 
विज्ञापन

5 of 6
टू‌र‌िस्‍ट - फोटो : अमर उजाला
टॉप 5 में सभी शहर सूबे के हैं। धूल कणों की संख्या बेहद खतरनाक स्तर को पार कर चुकी है। वहीं कार्बन मोनोक्साइड सामान्य से 50 गुना ज्यादा है। चिकित्सकों के मुताबिक कार्बन मोनोक्साइड की ज्यादा मात्रा बच्चों और गर्भवती महिलाओं, उनके बच्चों को ह्रदय रोगी बना सकती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
टू‌र‌िस्‍ट - फोटो : अमर उजाला
वहीं पीएम 2.5 कणों की ज्यादा मात्रा से फेफड़ों और लिवर के रोग तथा कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ह्रदयाघात और हड्डियों के रोग भी हो सकते हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें