ताजनगरी में जहरीली हवा फेफड़ों में पहुंचना बरकरार है लेकिन धूल कणों की संख्या में बारिश के कारण कुछ कमी आई है। इसका असर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बुधवार शाम चार बजे जारी किए गए एयर क्वालिटी इंडेक्स में नजर आया।
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यह मंगलवार के 424 अंक के मुकाबले बुधवार को 347 अंक तक आ गया, लेकिन धूल कणों में मामूली कमी के साथ वातावरण में खतरनाक कार्बन मोनोक्साइड और नाइट्रोजन डाइक्साइड की कई गुना मात्रा बरकरार है, जो सांस लेने में न केवल परेशानी खड़ी कर रही है बल्कि लोगों के श्वसन तंत्र को भी प्रभावित कर बीमार बना रही है।
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मंगलवार शाम को शुरू हुई बारिश रात तक चली, लेकिन इसका ज्यादा असर धूल कणों पर नहीं पड़ा। पूरे दिन में केवल दो मिमी बारिश हुई, लेकिन धूल कण उस अनुपात में कमी नहीं हो पाए। नेशनल हाईवे पर हो रही खोदाई और निर्माण कार्य के कारण धूल कणों की संख्या में कमी नहीं आ सकी।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जो आंकड़े बुधवार शाम को जारी किए गए, उनमें कानपुर सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में पहले नंबर पर रहा तो आगरा चौथे स्थान पर रहा। देश के सबसे प्रदूषित दस शहरों में से सात उत्तर प्रदेश के हैं।
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टॉप 5 में सभी शहर सूबे के हैं। धूल कणों की संख्या बेहद खतरनाक स्तर को पार कर चुकी है। वहीं कार्बन मोनोक्साइड सामान्य से 50 गुना ज्यादा है। चिकित्सकों के मुताबिक कार्बन मोनोक्साइड की ज्यादा मात्रा बच्चों और गर्भवती महिलाओं, उनके बच्चों को ह्रदय रोगी बना सकती है।