आगरा के बाह में बाढ़ ने यहां के लोगों की जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। अपने घरों को छोड़कर लोगों ने बीहड़ के टीलों पर डेरा जमा लिया है। उनके पास न खाने के लिए कुछ और नाहीं पीने का पानी है। ऐसे में जिला प्रशासन जहां बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मदद पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, तो वहीं शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तीन मंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए पहुंचे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुक्रवार दोपहर प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल, परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह और प्राविधिक शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी चंबल की बाढ़ के हालात का जायजा लेने पिनाहट चंबल नदी घाट पहुंचे। चंबल नदी किनारे स्थित चंबल डाल नहर परियोजना की द्वितीय पम्प हाउस की इमारत के ऊपर चढ़कर नदी के हालात का जायजा लिया। करीब बीस मिनट तक रुकने के बाद चंबल डाल नहर परियोजना के प्रथम पम्प हाउस पर आयोजित कार्यक्रम में किसानों को बाढ़ से हुए नुकसान का आंकलन किया।
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किसानों से बात करते मंत्री
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान मंत्रियों ने बताया ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर हालात का आंकलन करने आए हैं, जिसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौपेंगे। किसानो के नाम व गांव के नाम भी लिखे हैं, जिसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को दी जायेगी।
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केबिनेट मंत्री आशीष पटेल एवं राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यमंत्री रजनी तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलवाया जायेगा। इस दौरान क्षेत्रीय विधायक पक्षालिका सिंह, सीडीओ ए मणिकंडन, एसपी पूर्वी सोमेंद्र मीणा, एसडीएम बाह रतन वर्मा समेत सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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उफनाई चंबल
- फोटो : अमर उजाला
खतरे के निशान से ऊपर बह रही चंबल
चंबल खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। चंबल का जलस्तर 137.80 मीटर पहुंच गया है, जो शुक्रवार सुबह यहां स्थिर हो गया है। हालांकि मुसीबतें अभी बरकरार हैं। कई लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने का क्रम जारी है।
बता दें बीहड़ में बसे 20 गांव में हालात खराब हैं। रास्तों पर 10 से 20 फुट तक पानी भरा है। घर डूब गए हैं। लोग सामान लेकर छतों पर फंसे हुए हैं। बाढ़ग्रस्त गांव के लोग ऊंचे टीलों पर डेरा डाल रहे हैं। जबकि सैंकड़ों बुजुर्ग, बच्चे व महिलाएं बाढ़ से घिरे गांव में फंसे हुए हैं। चंबल का रौद्र रूप देखकर एक तरफ प्रशासन के हाथ-पांव फूल रहे हैं, दूसरी तरफ राहत व बचाव के इंतजाम धूल चाट रहे हैं।