मथुरा में भगवान कृष्ण की नगरी में छोटे बड़े मंदिरों में चढ़ने वाले फूल की मात्रा को अगर जोड़ लिया जाए तो अकेले गर्मियों में ही 7200 क्विंटल फूल ठाकुरजी के चरणों में चढ़ जाता है। बाद में इस फूल को यमुना में बहा दिया जाता है। मथुरा और वृंदावन को मंदिरों का शहर कहा जाता है।
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भव्य सजावट
- फोटो : अमर उजाला
भगवान कृष्ण की इस नगरी में पांच हजार मंदिर हैं। सबसे ज्यादा मंदिर वृंदावन में हैं। यूं तो साल भर भगवान के चरणों में फूल चढ़ाए जाते हैं लेकिन गर्मियों के दिनों में फूल की मांग कई गुना बढ़ जाती है। अप्रैल से फूलबंगले सजने का सिलसिला शुरू हो जाता है। अप्रैल से जुलाई तक फूलबंगले सजाए जाते हैं।
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मंदिर की भव्य सजावट
- फोटो : अमर उजाला
बांकेबिहारी मंदिर वृंदावन में तो इन महीनों में हर रोज फूलबंगले सजाए जाते हैं। फूल बंगला सजाने वाले एक्सपर्ट की अगर माने तो चार महीनों में अकेले वृंदावन में ही चार हजार क्विंटल फूल की खपत हर रोज हो जाती है। मथुरा के साथ ही दिल्ली से भी फूल मंगवाया जाता है।
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भव्य सजावट
- फोटो : अमर उजाला
वहीं मथुरा में भी श्री कृष्ण जन्मस्थान और द्वारिकाधीश पर हर रोज फूलबंगले सजाए जाएंगे। गोकुल, बरसाना, गोवर्धन, नंदगांव और महावन के मंदिरों में भी भगवान को गर्मी से राहत दिलाने के लिए फूलबंगले सजाए जाएंगे।
मथुरा में भी दो हजार क्विंटल फूल रोज लग जाता है। कुल मिलाकर छह हजार क्विंटल फूल की जरूरत रोज पड़ेगी। इस हिसाब से चार महीने में 7200 क्विंटल फूल का प्रयोग हो जाता है।