जग प्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में 26 जुलाई को हरियाली तीज पर एक बार फिर ठाकुरजी अपने अनोखे और दुनिया में विशिष्ट हिंडोले (झूला) में विराजेंगे। ठाकुरजी का यह हिंडोला अपने आप में खास इसलिए है क्योंकि...
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
इस मनोहारी हिंडोले का पूरा निर्माण सोने और चांदी से हुआ है। खास बात यह भी है कि ठाकुरजी केवल हरियाली तीज के दिन ही इस हिंडोले में विराजकर झूला झूलते हुए अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। ऐसे में मंदिर प्रबंधन तीज महोत्सव की तैयारियों में जुटा है। आगे पढ़िए हिंडोले का इतिहास..
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि 15 अगस्त 1947 को आजादी के दिन पहली बार ठाकुरजी ने स्वर्ण रजत हिंडोले में दर्शन दिए थे उसी दिन हरियाली तीज का भी पावन पर्व भी था।
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत ब्रजकिशोर गोस्वामी ने बताया कि सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय भक्त लाला हरगुलाल ने इसका निर्माण शुरू कराया था।
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बांकेबिहारी मंदिर
बनारस के कारीगर छोटेलाल और ललन भाई के निर्देशन में 20 कारीगरों ने पांच वर्ष में इसे तैयार किया। यह फोल्डिंग हिंडोला है। एक लाख तोले चांदी और 2200 तोले सोने के अलावा शीशम की लकड़ी से यह हिंडोला बना है। बनते समय इसकी लागत करीब 25 लाख रुपये रही थी।
बताया गया है कि तीज पर शाम को मंदिर के पट खुलने के बाद अर्द्धरात्रि तक ठाकुर बांकेबिहारी महाराज स्वर्ण रजत निर्मित हिंडोले में दर्शन देंगे। सेवायत रघु गोस्वामी ने बताया कि हरियाली तीज से वृंदावन के मंदिरों में हिंडोला उत्सव का विधिवत शुभारंभ हो जाता है। यह महोत्सव रक्षाबंधन तक झूलनोत्सव के रूप में चलता है।