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शिक्षक दिवस: ऐसे गुरूओं की कहानी, जो किताबों से आगे बढ़कर संवार रहे शिष्यों की जिंदगी; आप भी करेंगे इनकी तारीफ

Sat, 05 Sep 2026 10:27 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

शिक्षक दिवस पर आगरा के ऐसे शिक्षकों की प्रेरक कहानियां सामने आई हैं, जो किताबों से आगे बढ़कर विद्यार्थियों का भविष्य संवार रहे हैं। कोई खुद बैसाखियों के सहारे स्कूल पहुंचकर बच्चों को आत्मनिर्भर बना रहा है, तो कोई जरूरतमंद विद्यार्थियों को अपनी जेब से वर्दी दिला रहा है।

 
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शिक्षक पंकज सिंघल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शिक्षक की भूमिका सिर्फ किताबों का ज्ञान देने तक सीमित नहीं है। बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को उड़ान देने का काम कर रहे हैं। कोई खुद बैसाखियों के सहारे स्कूल पहुंचकर विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने का हौसला दे रहा है, तो कोई आर्थिक अभाव में पढ़ रहे बच्चों की जरूरतें अपनी जेब से पूरी कर रहे हैं। तो कोई विद्यार्थियों बेहतर शिक्षा दे उन्हें रोजगार दिलाने का काम रहा है।



बेसाखियों के सहारे खुद, लेकिन विद्यार्थियों का बन रहे सहारा
स्टोरी-1

खेरागढ़ ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय चीप में तैनात 47 वर्षीय शिक्षक पंकज सिंघल खुद दिव्यांग हैं। बैसाखियों के सहारे स्कूल पहुंचने वाले पंकज करीब 15 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि भले ही वह खुद बैसाखी के सहारे चलते हैं, लेकिन उनके विद्यार्थी जिंदगी में किसी के सहारे के मोहताज न रहें। पढ़ाई के साथ पंकज बच्चों को खेलों के लिए भी तैयार करते हैं। उनके विद्यार्थियों की वालीबॉल टीम राज्य स्तर तक पहुंच चुकी है।

 
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डॉ. मनोज वार्ष्णेय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शिक्षक नई शिक्षण विधियों से जुड़ें
स्टोरी-2

डायट में पिछले आठ वर्षों से प्रवक्ता डॉ. मनोज वार्ष्णेय ने शिक्षण प्रशिक्षण को अपनी पहचान बनाया है। वर्ष 2024-25 में वह जापान में शिक्षक प्रशिक्षण के लिए गए और आईआईएम अहमदाबाद में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनका प्रयास है कि शिक्षक नई शिक्षण विधियों से जुड़े और उसका सीधा लाभ विद्यार्थियों की पढ़ाई में दिखाई दे।

 
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शिक्षिका मिली जैन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
स्टोरी-3
40 से अधिक विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगिताओं में चुने

प्राथमिक विद्यालय नानपुर, बिचपुरी की शिक्षिका मिली जैन वर्ष 2013 से बच्चों को पढ़ा रही हैं। उनके 40 से अधिक विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगिताओं और विभागीय परीक्षाओं में सफलता हासिल कर चुके हैं। विद्यार्थियों को विप्रो पर्यावरण राज्य पुरस्कार भी मिल चुके हैं। मिली जैन को पाठ्य योजनाओं के लिए तीन बार पुरस्कार, कहानी लेखन में राज्य स्तरीय पुरस्कार, तीन बार विप्रो पर्यावरण राज्य पुरस्कार और तीन बार जिला उत्कृष्ट शिक्षिका पुरस्कार मिल चुका है।

 

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भौतिक विज्ञान प्रवक्ता राजेश गुप्ता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
स्टोरी- 4
60 से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों को खुद स्कूल यूनिफॉर्म दिलाई

भदावर विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, बाह के भौतिक विज्ञान प्रवक्ता राजेश गुप्ता के लिए शिक्षक होने का मतलब जरूरतमंद बच्चों की मदद करना भी है। पिछले तीन वर्षों में वह 60 से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों को अपने स्तर से स्कूल यूनिफॉर्म उपलब्ध करा चुके हैं। कोविड काल में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए निशुल्क ऑनलाइन भौतिक विज्ञान की कोचिंग शुरू की थी।

 
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आगरा विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
स्टोरी-5
2005 में यंग साइंटिस्ट अवाॅर्ड मिला

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग में 28 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे डॉ. मनु प्रताप सिंह ने भी पढ़ाई को रोजगार से जोड़ने की पहल की। वर्ष 2005 में यंग साइंटिस्ट अवाॅर्ड मिला। वर्ष 2025 में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें बेस्ट शिक्षक अवाॅर्ड से सम्मानित किया। विश्वविद्यालय में समर्थ पोर्टल स्थापित करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर प्लेसमेंट की पहल की। आज उनके पढ़ाए विद्यार्थी देश की बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं।
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