कैंट स्टेशन से महज पांच किमी. दूर रेलवे की पुलिया में छह महीने से पानी भरा होने के कारण 2500 स्कूली बच्चों सहित 10 हजार की आबादी जान जोखिम में डालकर ट्रेनों के नीचे से होकर गुजरने के लिए मजबूर है। पुलिया का नगला और मुस्तफा र्क्वाटर के इन लोगों के घुटने तक छिल रहे हैं। मरीजों को भी इसी मुसीबत से दो चार होना पड़ रहा है। सबसे शर्मनाक यह है कि शवयात्रा भी ट्रेन के नीचे होकर निकाली जा रही है।
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आउटर से रेल की पटरियों का पार करतीं स्कूलीं छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
यह कैंट स्टेशन के आउटर का इलाका है। इस कारण दिन में ज्यादातर समय ट्रेनें खड़ी रहती हैं। खासकर मालगाड़ी घंटों खड़ी रहती है। बारिश शुरू होते ही यह दिक्कत सामने खड़ी हो जाती है। नगला पुलिया के एक ओर नाले का पानी भरा हुआ है। यह पानी रेलवे के तालाब नंबर दो से ओवरफ्लो होकर यहां भर गया है।
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रेल की पटरियों से निकलते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
महात्मा गांधी इंटर कालेज, नवजीवन विद्यापीठ, ज्ञानदीप जूनियर हाईस्कूल, शहजादी बेगम इंटर कॉलेज, सीएल गुप्ता इंटर कॉलेज, ब्रजवासी हायर सेकेंडरी स्कूल, एडीएम पब्लिक स्कूल, एसपीएस पब्लिक स्कूल, मोतिनी देवी इंटर कॉलेज, जॉय हैरिस इंटर कॉलेज, छावनी इंटर कॉलेज, सेंट फ्रांसिस कॉलेज के छात्र-छात्राओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। वहीं नगला पुलिया, महावीर नगर, शिव नगर, मुस्तफा क्वार्टर, हरि भवन, न्यू जनता कॉलोनी, जुम्मन खां की झोपड़ी के लोग प्रभावित होते हैं।
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रेलवे ट्रैक से होकर निकलते स्कूली बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
पुलिया का वैकल्पिक मार्ग छह किमी. दूर है। जो बच्चे इसका इस्तेमाल करते हैं। उनको स्कूल जाने और वापस आने में 12 किमी. चलना पड़ता है। इसमें लगभग तीन घंटे लग जाते हैं। थकान अलग से होती है। ऐसे बच्चों की संख्या 200 है। इनके अभिभावक इन्हें थोड़ी दूरी तक छोड़ने के लिए आते हैं। वे देखते हैं कि बच्चे ट्रेन के नीचे से तो नहीं जा रहे।
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अंडरपास नहीं होने से ट्रैक पर साइकिल उठाकर निकलतीं छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
मुसीबत झेल रहे लोगों का कहना है कि दो साल से सांसद, विधायक और रेल अफसरों से मिल रहे हैं, लिखित शिकायत दे रहे हैं, कोई सुनवाई नहीं है। न पानी निकलवाया जा रहा है, न अंडरपास बनवाया जा रहा है।
जुलाई 2019 में डीआरएम रंजन यादव ने नगला पुलिया से मुस्तफा क्वार्टर के बीच अंडरपास बनवाने को सर्वे करवाया था। इसकी लागत 8.63 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस कार्य को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करवाने के लिए मंडलायुक्त को पत्र भेजा गया था। जिला प्रशासन से इस बाबत कोई जवाब नहीं मिला है। -एसके श्रीवास्तव, वाणिज्य प्रबंधक, आगरा रेल मंडल