प्राइवेट एंबुलेंस के लिए पैसे नहीं थे तो पिता के लिए बेटे ने ठेले को एंबुलेंस बना लिया। ठेले पर जब बुजुर्ग पिता को लिटाकर युवक निकला, तो देखने वाले हैरान रह गए। भीषम गर्मी में पिता को धूप से बचाने के लिए एक चादर से उन्हें ढक दिया। युवक ने बताया कि पिता के हाथ और पैर दोनों में फ्रैक्चर हो गया था, जिसके वजह से वे चल नहीं सकते थे। अस्पताल में पिता को ले जाने के लिए एंबुलेंस तो कर लेता, लेकिन इतने पैसे नहीं थे।
प्लास्टर कटवाने के लिए जाना था एसएन
खटीकपाड़ा निवासी पिंकी बृहस्पतिवार को अपने पिता पूरनचंद को ठेले पर लिटाकर एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में दिखाने के लिए पहुंचे। पिंकी ने बताया कि उनके पिता ताजगंज श्मशान घाट गए थे, वहां गिर गए। हाथ और पैर दोनों में फ्रैक्चर हो गया था। बृहस्पतिवार को पिता के हाथ का प्लास्टर कटवाने के लिए एसएन जाना था।
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पिता को ठेले से ले गया अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
एंबुलेंस या अन्य कोई वाहन बुलाने के लिए रुपये नहीं थे। पिता को अस्पताल ले जाने के लिए उन्होंने पड़ोसी विनोद से ठेला लिया। विनोद भी सहायता के लिए उनके साथ आ गए। दोनों सुबह करीब 10:30 बजे ओपीडी पहुंचे और 01:45 बजे दिखाकर लौटे।
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एंबुलेंस के लिए नहीं थे पैसे
- फोटो : अमर उजाला
पिंकी ने बताया कि ठेले पर दरी बिछा रखी थी। जाते समय धूप अधिक थी तो पिता को चादर से ढक दिया था। पिंकी मजदूरी करके घर चलाते हैं।
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स्ट्रेचर पर मरीज को खुद ही ले जाते तीमारदार
- फोटो : अमर उजाला
वार्ड ब्वॉय नहीं मिला, तीमारदारों को ले जानी पड़ी स्ट्रेचर
एसएन मेडिकल कॉलेज में ओपीडी से दूसरे विभागों में मरीजों को ले जाने के लिए वार्ड ब्वॉय नहीं मिलने की समस्या रही। बृहस्पतिवार को औरैया के राजन हड्डी रोग विभाग में दिखाने के लिए पहुंचे थे।
उनके पैर में फ्रैक्चर था और रॉड डाली गई थी। रॉड को निकलवाने के लिए उनको आठ मंजिला इमारत में जाने के लिए कहा गया। वार्ड ब्वॉय नहीं मिला। ओपीडी से आठ मंजिला भवन तक करीब 400 मीटर स्ट्रेचर को खींचकर तीमारदारों को ले जाना पड़ा। दोपहर करीब एक बजे का समय था। तेज धूप थी। तीमारदार पहले मेडिसिन विभाग के बाईं ओर से मरीज को ले जा रहे थे, देखा की रोड खुदा पड़ा है तो फिर लौटकर दाईं ओर से गए।