अत्याचार की पराकाष्ठा के बीच अपने मामा कंस की जेल में जन्मे कन्हैया अपनी जन्मस्थली पाने के लिए कानूनी महाभारत लड़ रहे हैं। देवकी सुत जन्म लेने के 5248 वर्ष बाद न्यायालय में चल रहे 12 मुकदमों में वादी हैं। अदालत की दहलीज पर हर तारीख पर उन्हें कभी ठाकुर केशवदेव तो कभी श्रीकृष्ण विराजमान बनना पड़ रहा है। उनके भक्त कृष्ण जन्मस्थली पर हक पाने के लिए न्यायालय में इतिहास के पन्नों को खंगाल रहे हैं।
आज के ही दिन करीब 5248 वर्ष पहले जब कंस की जेल में कन्हैया का जन्म हुआ था, तब जेल किस स्थान पर थी, यह इतिहास के गर्त में है लेकिन दावेदारों ने अदालत में जो तथ्य पेश किए हैं उनमें उन्होंने साफ तौर शाही ईदगाह मस्जिद के स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मस्थल माना है। भक्तों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को केस में वादी बनाया गया है। किसी ने श्रीकृष्ण विराजमान तो किसी ने उन्हें ठाकुर केशवदेव के रूप में माना है।