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बिल्डिंग हादसा: सुरेंद्र के हंसते खेलते परिवार को लगी किसकी नजर, खाना बनाने वाला भी कोई नहीं बचा

Fri, 20 Jul 2018 10:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
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विलाप करते हुए सुरेंद्र त्रिवेदी - फोटो : अमर उजाला
नोएडा में हुए हादसे के बाद एक ही परिवार के चार सदस्यों के शव गुरुवार की शाम पांच बजे पैतृक गांव उद्दैतपुर अभई में पहुंचे। सुरेंद्र त्रिवेदी के घर से एक साथ चार अर्थियां निकलीं पूरे गांव में कोहराम मच गया। हर किसी की आंखों में आंसू थे, जो थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गांव के बाहर जमा हजारों लोगों की भीड़ भी अपने आंसू नहीं रोक सकी। लोगों की जुबां पर एक ही चर्चा रही, आखिर सुरेंद्र त्रिवेदी के हंसते खेलते परिवार को किसकी नजर लग गई। घर में अब कोई खाना बनाने वाला तक नहीं बचा है। सुरेंद्र को दिलासा देते समय गांव के लोग खुद अपने आंसू बहा रहे थे। सुरेंद्र और उनके बेटे राम त्रिवेदी का रो रोकर बुरा हाल था। अर्थियों को कंधा देने के लिए पूरे गांव में होड़ लगी रही। गांव के बाहर कुरावली रोड किनारे श्मशान घाट पर शाम साढ़े छह बजे तीन शवों का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं बच्ची को पास में दफनाया गया।  
 
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Building Collapse
सुरेंद्र को अपने छोटे बेटे शिव पर नाज था। वह गांव में अक्सर अपने बेटे का युवाओं को उदाहरण देते थे। घर से निकलकर एमबीए की पढ़ाई करने के बाद गोदरेज कंपनी में नोएडा में प्रबंधक की नौकरी करने लगा था। नोएडा में मकान खरीदते समय भी उसने पिता से ही राय ली थी। शादी करने के लिए वह कुछ और कमाने की बात कहकर टाल देता था। 
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गांव में विलाप करते हुए लोग - फोटो : अमर उजाला
सुरेंद्र के मुंह से एक ही बात निकलती रही कि शिव ने आखिर किसका क्या बिगाड़ा। उनके परिवार को किसकी नजर लग गई। अंतिम संस्कार के समय सुरेंद्र अपने पुत्र राम को और राम अपने वृद्ध पिता को संभालते रहे। राम की तो दुनिया ही उजड़ गई। नोएडा हादसे से उनको गहरा धक्का लगा है। वह बार-बार अपनी मासूम बेटी को ही याद करते हैं। अंतिम संस्कार के समय भी राम अपनी बेटी को ही याद करके रोते रहे। मां और पत्नी को हादसे में गंवाने वाले राम के घर पर अब कोई खाना बनाने वाला तक नहीं बचा है।
 

बिल्डिंग हादसा: सुरेंद्र के हंसते खेलते परिवार को लगी किसकी नजर, खाना बनाने वाला भी कोई नहीं बचा

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शव पहुंचते ही गांव में लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
उद्दैतपुर अभई निवासी सुरेंद्र त्रिवेदी के पुत्र शिव त्रिवेदी ने ग्रेटर नोएडा में हाल ही में फ्लैट खरीदा था। मंगलवार की रात बिल्डिंग ढहने से शिव त्रिवेदी, उनकी मां राजकुमारी, भाभी प्रियंका और भतीजी पंखुड़ी की मौत हो गई थी। गुरुवार की शाम पांच बजे जैसे ही सभी के शव गांव में पहुंचे तो चारों ओर कोहराम मच गया। पोस्टमार्टम के बाद तीन एंबुलेंस से लाए गए चार शवों को घर के बाहर रखा गया। अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई। अंतिम संस्कार के लिए चार शव लेकर घर से निकले लोगों की आंखों में आंसू थे।        
 
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विलाप करते हुए परिजन - फोटो : अमर उजाला
हादसे में पूरे परिवार को गंवाने वाले राम त्रिवेदी अपने आंसुओं को रोककर अपने वृद्ध पिता को रास्ते भर दिलासा देते रहे। एक साथ हुई चार मौतों से सुरेंद्र को सदमा लगा है। वह दहाड़ मारकर रोते तो कभी गुमसुम हो जाते हैं। गांव के बाहर गमगीन माहौल में शाम साढ़े छह बजे सुरेंद्र ने अपनी पत्नी राजकुमारी, राम ने अपने छोटे भाई शिव, अपनी पत्नी प्रियंका को मुखाग्नि दी। पास में ही गड्ढा खोदने के बाद पंखुड़ी के छोटे बाबा नरेंद्र त्रिवेदी ने शव को जमीन में दफनाया दिया। इस बीच करीब एक हजार से अधिक लोगों की भीड़ गांव में जमा रही।
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