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यूपी: थार के बोनट पर आखिरी तस्वीर, फिर हुआ भयानक हादसा; 38 मिनट बाद तीन दोस्तों की दर्दनाक मौत

Mon, 19 Oct 2026 09:26 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा से मसूरी घूमने जा रहे पांच दोस्तों की थार कार सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में तीन दोस्तों की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे से पहले सक्षम ने थार के बोनट पर बैठकर इंस्टाग्राम पर फोटो साझा की थी। महज 38 मिनट बाद हुए हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं।
 
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तीन दोस्तों की मौत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा से मसूरी जा रहे पांच दोस्तों की थार गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में तीन दोस्तों की मौत हो गई, दो गंभीर घायल हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना से परिवारों में कोहराम मच गया।  साहिल, राहुल, सक्षम, सचिन वर्मा और हेमंत वर्मा शनिवार रात करीब नौ बजे घर से मसूरी के लिए निकले थे। पांचों थार गाड़ी में सवार थे। रविवार तड़के सहारनपुर जिले में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। नागल के बेलड़ा जुनारदार के पास गोल चक्कर पर तेज रफ्तार थार कार अनियंत्रित होकर पलट गई। 



 
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थार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं सक्षम का मौत से पहले का सोशल मीडिया पर आए पोस्ट ने परिवार के लोग और दोस्तों के आंखें नम कर दीं। सहारनपुर में पेट्रोल पंप पर शनिवार रात 2:10 बजे सक्षम ने इंस्टाग्राम पर थार गाड़ी के बोनट पर बैठकर फोटो शेयर की थी। 38 मिनट बाद सक्षम समेत तीन मित्रों की जान चली गई। साहिल पांच दिन के लिए अपने घर की देखभाल करने दिल्ली से आया था।

 
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फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भैया, अब तो रात हो गई…आजा, लेकिन तेरी तो लाश आ गई
सहारनपुर में हुए सड़क हादसे ने टेढ़ी बगिया निवासी राहुल के परिवार की खुशियां छीन लीं। राजमिस्त्री पिता गोपाल सिंह के परिवार में राहुल ही वह सहारा था, जिसके कंधों पर दो छोटी बहनों की शादी की जिम्मेदारी थी। मां मछला देवी की आंखों में आंसू हैं और जुबां पर एक ही सवाल कि अब उनकी बेटियों के हाथ पीले कैसे होंगे।

 

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फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लैब में नौकरी करता था राहुल 
परिवार के लोगों ने बताया कि राहुल लैब में नौकरी करता था। उससे छोटी बहनें प्रिया और प्रियंका हैं, जबकि दो भाई रोहित और आदित्य हैं। मां के मुताबिक राहुल ही परिवार की उम्मीद था। उसकी मौत से परिवार का सहारा छिन गया है।
छोटी बहन प्रिया ने बताया कि शनिवार रात करीब 10 बजे भाई का फोन आया था। उसने कपड़े पैक करने को कहा और बताया कि वह मंसूरी घूमने जाएगा। अभी मैं बाहर हूं सुबह तक लौट आऊंगा। बहनों को क्या पता था कि भाई से यह आखिरी बातचीत होगी। बिलखती प्रिया की जुबां पर बस यही शब्द हैं, ‘भैया, अब तो रात हो गई… आजा, लेकिन तेरी तो लाश आ गई।



 
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फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मोबाइल देखकर पिता याद करते रहे राहुल की आखिरी कॉल
दशहरे की छुट्टियों में दोस्तों के साथ घूमने की खुशी, घर से निकलते वक्त अपनों से हुई बातें और जल्द लौट आने का भरोसा... किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कुछ घंटों बाद यही सफर तीन परिवारों की जिंदगी में ऐसा अंधेरा भर देगा, जिसे कभी दूर नहीं किया जा सकेगा। हादसे ने तीन युवकों की मौत ने तीन परिवार को जिंदगी भर का दर्द दे दिया। राहुल के पिता गोपाल सिंह को अब भी बेटे से हुई आखिरी बातचीत याद आ रही है। उन्होंने बताया कि राहुल शनिवार दोपहर कार लेकर घर से निकला था। रात करीब आठ बजे उन्होंने फोन किया तो राहुल ने कहा कि वह अभी घर आ रहा है। कुछ देर बाद बेटे का फिर फोन आया। उसने बताया कि वह घूमने जा रहा है।

 
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थार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता ने घर लौटने के लिए कहा लेकिन राहुल नहीं माना। उन्हें क्या पता था कि बेटे को घर आने के लिए कहने वाली यह बातचीत आखिरी यादों में शामिल हो जाएगी। कुछ देर बाद कमला नगर में रहने वाले भतीजे ने फोन कर राहुल के एक्सीडेंट की खबर दी। राहुल पांच भाई-बहनों में से एक था और निजी डॉक्टर के यहां कंपाउंडर का काम करता था। हादसे की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

 
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सड़क हादसा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आंख खुली तो खुद को सड़क पर पाया
जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती सचिन ने बताया कि नोएडा में नौकरी करता हूं। दशहरे की छुट्टी पर घर आया था। थार में आगे की सीट पर बैठा था। हादसे के समय वह सो रहा था। जब आंख खुली तो खुद को सड़क पर पड़ा पाया। बाद में पता चला कि हादसा हो गया। सिर में गंभीर चोट आई है। हेमंत मेरे चाचा का बेटा है। हादसे का पता लगने के बाद एसपी यातायात शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव एसबीडी जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। यहां ट्रामा सेंटर में भर्ती सचिन और हेमंत का हालचाल जाना। घायलों से बात करने की कोशिश की, लेकिन गंभीर होने की वजह से तब हेमंत व सचिन बात नहीं कर पाए। वहां मौजूद अन्य दोस्तों से हादसे के बारे में जानकारी ली।
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