देश व्यापी स्वच्छता सर्वे में ताजमहल के शहर को मायूसी का सामना करना पड़ा है। देश के कुल 434 शहरों में हुए सर्वेक्षण में आगरा को 263 वां स्थान मिला है। मध्य प्रदेश के शहर के इंदौर को पहला नंबर और वहां की राजधानी भोपाल को दूसरा स्थान मिला है। उत्तर प्रदेश के शहरों में आगरा का नौवां स्थान है।
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- फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि पूरे देश में स्वच्छता सर्वे चार जनवरी 2017 को प्रारंभ हुआ था। आगरा में भारत सरकार की टीम ने 11,12 और 13 जनवरी को सर्वे किया था। टीम ने शहर में नगर निगम के अधिकारियों के साथ शहर दौरा किया था। इसके साथ ही एक टीम ने गोपनीय तरीके शहर वासियों को फीडबैक लिया था। एक टीम नगर निगम के संसाधनों की पड़ताल की थी।
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सर्वे के अनुसार पब्लिक की खराब फीडबैक, डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन न होना, शहर का कूड़ा निस्तारण का प्लांट भी चालू न होना, शहर की आबादी के हिसाब से आनलाइन कंपलेंट कम और आनलाइन शिकायत का समय पर निस्तारण न होने ताजनगरी के पिछड़ने के कारण रहे। वहीं नगर निगम के कर्मचारी नेता श्याम कुमार करुणेश का कहना है कि शहर की आबादी करीब 20 लाख है। इस हिसाब से करीब 6000 सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है। वर्तमान में निगम में करीब 2600 कर्मचारी हैं। इनमें करीब 700 कर्मचारी संविदा पर हैं। किसी भी सरकार ने सफाई व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया।
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आगरा के मेयर इंद्रजीत आर्य का कहना है कि यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि शहर को सफाई में 263 वां स्थान मिला है। यह पिछली सरकार की नाकामी और नौकरशाही का मनमानी का परिणाम है। अधिकारी सपा के एजेंट बनकर लूट खसोट में लगे रहे। शहर की बेहतरी के लिए मैंने सपा सरकार की कदम बढ़ाया था लेकिन वहां न तो मुझे सम्मान मिला और न शहर को।
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होटल व्यवसायी राजकुमार खंडेलवाल कहते हैं कि सफाई सर्वे में आगरा को मिले 263 वे स्थान से शहर की छवि को धक्का लगा है। आगरा विश्व विख्यात शहर है। खूबसूरती की मिसाल ताजमहल यहां है लेकिन शहर इतना गंदा है तो आप ही बताइये पर्यटकों के मन में आगरा की छवि कैसी होगी। इसके लिए निगम ही नहीं जनता भी जिम्मेदार है।
समाजसेवी दिगंबर सिंह धाकरे का कहना है कि यह परिणाम शहर के लिए निराशाजनक है। एक ओर हम स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ रहे हैं और दूसरी सफाई के मामले में अंतिम पायदान पर हैं लेकिन इसमें केवल नगर निगम की मशीनरी को दोष नहीं दिया जा सकता है। जनता को भी सफाई के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। एक तरफ कर्मचारी सफाई करके जाते हैं, दूसरी ओर लोग वहीं गंदगी फैलाना शुरू कर देते हैं। घरों में डस्टबिन तक रखना भी लोग जरूरी नहीं समझते हैं।