राजू गुप्ता हत्याकांड में आगरा पुलिस की कमजोरियां खुलकर सामने आ रही हैं। यह बड़े इम्तिहान का समय है क्योंकि मुल्जिम पुलिस महकमे से भी हैं। इस इम्तिहान में अभी तक तो पुलिस फेल ही साबित हुई है। आधा महीना बीत जाने पर आरोपी दरोगा अनुज सिरोही की गिरफ्तारी करना तो दूर यह तक पता नहीं चल पाया है कि वह कहां पर छिपा है?। इतना ही नहीं नामजद आरोपी अंशुल का भी कोई सुराग नहीं है।
एडीजी जोन अजय आनंद अल्टीमेटम दे चुके। डीआईजी लव कुमार ने भी सख्त हिदायत दी है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जी जान से जुटा जाए। इसके बावजूद नतीजा सिफर है। जाहिर है। या तो कोशिश पूरे मन से नहीं की जा रही है या फिर इंतजार किया जा रहा है कि मामला कब शांत हो और जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए।
पुलिस पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कोर्ट भी टिप्पणी कर चुकी है कि ऐसा प्रतीत होता है कि अभियुक्तों को नाजायज लाभ दिए जा रहा है। कोर्ट की बात इसलिए भी साबित हो रही है क्योंकि फरार मुल्जिम पकड़े नहीं जा रहे हैं। जिनका नाम है, पता है, फोटो है, रिश्तेदारों की जानकारी है, वे भी गिरफ्तार नहीं किए जा रहे हैं, तो सवाल तो उठेंगे ही।
गवाहों के बयान दर्ज कराने का आदेश
अनुज सिरोही की गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगा कि राजू गुप्ता को थर्ड डिग्री दिए जाने में और कौन कौन पुलिसकर्मी शामिल रहे? यह बात तो किसी के गले नहीं उतर रही है कि राजू को घर से लाकर थाने में पिटाई करने तक अकेला दरोगा अनुज सिरोही ही शामिल रहा। उस पर शक इसलिए हुआ क्योंकि वह राजू की मौत के बाद से वह गैर हाजिर हो गया।
कोर्ट ने राजू गुप्ता हत्याकांड के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर लोहामंडी थाना राजेश कुमार पांडेय को आदेश दिया है कि स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं। पिछली तारीख पर कोर्ट ने केस डायरी देख सवाल किया था कि अभी तक स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं।
राजू गुप्ता हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपी अधिवक्ता विवेक परिहार को शुक्रवार को रिमांड के लिए सीजेएम सर्वजीत कुमार सिंह की कोर्ट में पेश किया गया। विवेक की ओर से अधिवक्ताओं ने बहस की।
वकीलों ने किया विरोध प्रदर्शन
विरोध प्रदर्शन करते वकील
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। अभियोजन अधिकारी ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि विवेक का रिमांड पहले ही हत्या के मामले में स्वीकार किया जा चुका है। अब रिमांड खारिज किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। सीजेएम ने विवेक परिहार की ओर से की गई बहस के बाद सारी दलीलों को खारिज करते हुए विवेक को 20 दिसंबर तक केलिए जेल भेज दिया।
विवेक परिहार की ओर से आए अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि विवेक को बगैर साक्ष्य से गिरफ्तार किया गया। उसकी इस केस में कोई भूमिका नहीं है। वकीलों ने पुलिस मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। प्रदर्शन करने वालों में अधिवक्ता नरेंद्र सर्मा, भारत सिंह, उदयवीर सिंह, जयंत कुमार, मुकेश निगम, गिरीश कटारा, शैलराज सिंह, अनुरोध तिवारी, प्रवीन पाठक, राम विनोद शामिल रहे।