पुलवामा में 14 फरवरी, 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर हमले में शहीद हुए कहरई के कौशल किशोर रावत के स्मारक के लिए प्रशासन ने जमीन नहीं दी। परिवारीजन 11 महीने तक कलक्ट्रेट और कमिश्नरी के चक्कर काटकर थक गए। अब वे अपनी जमीन पर ही स्मारक का निर्माण करा रहे हैं। उनका कहना है कि यह बेहद शर्मनाक है कि शहादत के वक्त वादे करने वाले अफसर और नेताओं ने बाद में कोई ध्यान नहीं दिया।
विज्ञापन
2 of 5
कौशल कुमार रावत की अंतिम यात्रा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव आया तो अधिकारी, सांसद, विधायक और मंत्री पहुंचे थे। शहीद की मां सुधा रावत ने बताया कि उस समय सभी ने वादा किया था कि शहीद का स्मारक बनेगा, शहीद के नाम से द्वार बनेगा लेकिन बाद में किसी ने ध्यान नहीं दिया। पुत्रवधू (शहीद की पत्नी) ममता रावत ने कलक्ट्रेट और कमिश्नरी में अर्जी दी। अफसरों ने कहा कि प्रक्रिया चल रही है, उसने कई बार चक्कर काटे लेकिन जमीन का आवंटन नहीं हुआ।
विज्ञापन
3 of 5
निलंबित जिला विकास अधिकारी देवेंद्र प्रताप
- फोटो : अमर उजाला
शहीद के परिवार की आर्थिक मदद के लिए सरकारी कर्मचारियों से जुटाई गई राशि का दुरुपयोग करने पर डीडीओ देवेंद्र प्रताप सिंह को निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 29 जनवरी को की गई। देवेंद्र जांच में पैसे के गबन के दोषी पाए गए थे।
4 of 5
कौशल कुमार रावत की अंतिम यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
शहीद की मां ने बताया किउनके पति गीताराम स्मारक को उनके जीते जी बनवाना चाहते थे। उनके सामने ऐसा नहीं हो सका, 11 जनवरी को उनका निधन हो गया। अब परिवारीजनों ने अपनी जमीन पर निर्माण कार्य शुरु कराया है। निर्माण में ग्राम पंचायत की मदद मिल रही है।
शहीद कौशल किशोर रावत के बेटे अभिषेक ने बताया कि नेताओं और अफसरों ने कभी फोन करके भी नहीं पूछा कि स्मारक के लिए जमीन का आवंटन हुआ या नहीं? शहीद की स्मृति में द्वार बन रहा है या नहीं?
जमीन पर था विवाद : एसडीएम
एसडीएम सदर गरिमा सिंह का कहना है कि शहीद के स्मारक के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई थी, प्रस्ताव तैयार हो गया था, उनके परिवार के लोग इससे ज्यादा जमीन चाहते थे, इस पर गांव के लोगों को आपत्ति थी, इस कारण आवंटन नहीं हो सका।