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पुलवामा शहीद की बरसी: जवान की शहादत याद कर नम हुईं आंखें, अधूरे स्मारक पर दी श्रद्घांजलि

Fri, 14 Feb 2020 12:15 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
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शहीद रामवकील
पुलवामा में एक साल पहले हुए आतंकी हमले में मैनपुरी के सीआरपीएफ जवान रामवकील शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के एक साल पूरे होने पर परिवार और ग्रामीणों ने श्रद्घांजलि दी। गांव में युवाओं ने शहीद यात्रा निकाली और उनके अंत्येष्टि स्थल पर पुष्प चढ़ाए।
 
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शहीद रामवकील की पुण्यतिथि पर दी श्रद्घांजलि - फोटो : अमर उजाला
पुलवामा हमले में शहीद हुए विनायकपुर गांव निवासी शहीद रामवकील को शुक्रवार को परिजनों के साथ ही ग्रामीणों ने श्रद्धांजलि दी। शहीदस्थल पर मेले का भी आयोजन किया गया। बता दें कि रामवकील केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 176 बटालियन में हवलदार के पद पर तैनात थे। 
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स्कूली बच्चों ने देशभक्ति के गीत गाकर उनके बलिदान को याद किया - फोटो : अमर उजाला
रामवकील की प्रथम पुण्यतिथि पर परिजनों की आंखें नम थीं। युवाओं ने गांव में भारत माता की जयकार करते हुए शहीद यात्रा निकाली। वहीं स्कूली बच्चों ने देशभक्ति के गीत गाकर उनके बलिदान को याद किया।

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शहीद रामवकील - फोटो : अमर उजाला
प्रथम पुण्यतिथि पर शहीद की मांग अमितश्री अपने बेटे को याद करके रो पड़ती हैं। आखिर उन्होंने कलेजे का टुकड़ा जो खोया है। पत्नी गीता देवी का हाल भी कुछ ऐसा ही है। बरसी पर शहीद पति को याद करते हुए वीर नारी फफक पड़ीं। गीता देवी इटावा में रहकर बच्चों की परवरिश कर रही हैं।  
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शहीद स्मारक को नहीं है रास्ता - फोटो : अमर उजाला
रामवकील की शहादत के एक साल बाद भी स्मारक का निर्माण तक नहीं हो सका। सरकार द्वारा इसके लिए पांच बीघा का पट्टा तो आवंटित किया जा चुका है, लेकिन इसके लिए अब तक रास्ता नहीं मिल पा रहा है। 
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शहीद की पत्नी और मां - फोटो : अमर उजाला
शहीद की मां अमितश्री ने बताया कि बेटे को खोने का गम है, तो गर्व इस बात का है कि मेरे बेटे ने भारत मां की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। वह हमारे दिल में हमेशा जीवित रहेगा। पत्नी गीता देवी ने कहा कि मेरे पति ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। 
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