परेड की सलामी लेते एडीजी
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि कई बार पुलिसकर्मियों को 24-24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। इससे अपने व्यवहार में परिवर्तन न करें। अच्छे से काम करना चाहिए। इसके बाद एडीजी ने सभी को कर्तव्य पालन की शपथ दिलाई। आंतरिक और बाहृय परीक्षा में अव्वल रहने वालों को पुरस्कृत भी किया गया। सिपाहियों को आजमगढ़ में नई तैनाती दी जाएगी।
स्कूलिंग से ही मन में वर्दी पहनकर देश सेवा करने की चाहत थी। इसलिए जीतोड़ मेहनत की। उसका ही नतीजा रहा कि आखिर मुकाम पा लिया। वर्दी पहनकर जहां गर्व महसूस हो रहा है तो मां के पैर छूकर पूरी निष्ठा के साथ ड्यूटी करने का आशीर्वाद भी लिया। यह कहना था, गांव शोयेपुर, छोटा लालपुर, वाराणसी निवासी संजय कुमार गौड़ का। सिपाही बनने के बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
संजय ने बताया कि वह छोटे से गांव से है। पिता अशोक गौड़ एक कंपनी में नौकरी करते हैं। उनका सपना था कि वो देश की सेवा करे। इसलिए शुरू से ही तैयारी में लगा हुआ था। सिपाही भर्ती परीक्षा में संजय का चयन हो गया। पासिंग आउट परेड में उनकी मां निर्मला देवी आईं थी। बेटे को वर्दी पहनता देखकर उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। उन्होंने बेटे को अच्छे से काम करने के लिए आशीर्वाद भी दिया।