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पासिंग आउट परेड: 193 रंगरूट बने सिपाही, देश सेवा की ली शपथ

Thu, 24 Jan 2019 07:59 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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देश सेवा की शपथ लेते सिपाही - फोटो : अमर उजाला
आगरा में छह महीने की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 193 रंगरूट सिपाही बन गए। उन्होंने गुरुवार को पासिंग आउट परेड में देश सेवा की शपथ ली। इस दौरान एडीजी अजय आनंद ने परेड की सलामी ली। 

वर्ष 2018 में पुलिस लाइन आगरा में 202 सिपाहियों की ट्रेनिंग शुरू हुई थी। इस दौरान पुलिस विभाग से जुड़ी कई जानकारियां रंगरूट को दी गईं। इसके साथ ही कानून, मानवाधिकार, अच्छे आचरण का पाठ पढ़ाया गया। इनमें से 193 ने प्रशिक्षण पूरा किया। नौ रंगरूट परीक्षा में सफल नहीं हो सके। अब उनकी दोबारा परीक्षा कराई जाएगी।

पुलिस लाइन मैदान में गुरुवार को पासिंग आउट परेड हुई। इसके मुख्य अतिथि एडीजी अजय आनंद रहे। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी जनता के साथ अपना व्यवहार अच्छा रखें। उनकी समस्याओं को प्रमुखता से दूर करने का प्रयास करें। अपने वरिष्ठ अधिकारियों का सम्मान करें। 
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गांव की पगडंडी से निकले युवाओं को मिला मुकाम

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परेड की सलामी लेते एडीजी - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि कई बार पुलिसकर्मियों को 24-24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। इससे अपने व्यवहार में परिवर्तन न करें। अच्छे से काम करना चाहिए। इसके बाद एडीजी ने सभी को कर्तव्य पालन की शपथ दिलाई। आंतरिक और बाहृय परीक्षा में अव्वल रहने वालों को पुरस्कृत भी किया गया। सिपाहियों को आजमगढ़ में नई तैनाती दी जाएगी।

स्कूलिंग से ही मन में वर्दी पहनकर देश सेवा करने की चाहत थी। इसलिए जीतोड़ मेहनत की। उसका ही नतीजा रहा कि आखिर मुकाम पा लिया। वर्दी पहनकर जहां गर्व महसूस हो रहा है तो मां के पैर छूकर पूरी निष्ठा के साथ ड्यूटी करने का आशीर्वाद भी लिया। यह कहना था, गांव शोयेपुर, छोटा लालपुर, वाराणसी निवासी संजय कुमार गौड़ का। सिपाही बनने के बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

संजय ने बताया कि वह छोटे से गांव से है। पिता अशोक गौड़ एक कंपनी में नौकरी करते हैं। उनका सपना था कि वो देश की सेवा करे। इसलिए शुरू से ही तैयारी में लगा हुआ था। सिपाही भर्ती परीक्षा में संजय का चयन हो गया। पासिंग आउट परेड में उनकी मां निर्मला देवी आईं थी। बेटे को वर्दी पहनता देखकर उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। उन्होंने बेटे को अच्छे से काम करने के लिए आशीर्वाद भी दिया।
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'जनता की सेवा करूंगा'

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पासिग आउट परेड में सिपाही - फोटो : अमर उजाला
गांव अभुआरी, नरायनपुर, आजमगढ़ निवासी जितेंद्र कुमार पुत्र हरिकिशुन राम के पिता विदेश में रहते हैं। वह मार्बल कारीगर है। घर कम ही आ पाते हैं। जितेंद्र तीन भाई और एक बहन में सबसे बड़े हैं। उन्होंने बताया कि मां सुशीला देवी का सपना था कि वह देश सेवा करे। इसलिए शुरू से तैयारी की। अब मां का सपना पूरा हो गया है।

मोहल्ला मदनपुर, भदोही निवासी राहुल कुमार बिंद के पिता मुंशीलाल मुंबई में आटो चलाते हैं। राहुल दो भाई और तीन बहन में सबसे बड़ा है। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही पुलिस की वर्दी पहनना चाहता था। अब वह जनता की सेवा में सदैव तत्पर रहेगा। अपने काम को पूरी ईमानदारी के साथ करेंगे।

पांच गांव में पहला है सनी

गांव जलालपुर, वाराणसी निवासी सनी कुमार ने बताया कि पिता सुरेंद्र प्रसाद शिक्षक है। वह दो भाइयों में बड़ा है। क्षेत्र के पांच गांव में कोई भी पुलिस विभाग में भर्ती नहीं हुआ है। उसने न सिर्फ अपने मां-बाप का नाम रोशन किया, बल्कि गांव का भी। उन्होंने यही कहा कि वह अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा के साथ करेगा।
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सही तैयारी से मिलती है सफलता

गांव ढढोवल, फतेहपुर, मऊ निवासी मनीष सिंह ने बताय कि उसके पिता विजय बहादुर सिंह का कपड़े का कारोबार है। वह व्यापार नहीं करना चाहता था। वह पुलिस सेवा में भर्ती होना चाहता था। यही वजह थी कि उसने तैयारी की और सफल हो गया। उनका कहना था कि सही तैयारी से सफलता जरूर मिलती है।

बचपन से ही वर्दी पहनना चाहता था

गांव चकमान सिंह, भदोही निवासी प्रदीप कुमार पुत्र स्व. शिव सागर पाल बचपन से ही वर्दी पहनकर देश की सेवा करना चाहते थे। इसके लिए तैयारियों में लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि वह जनता की सेवा करना चाहते हैं। उनके गांव में कोई पुलिस वाला नहीं है। अपने वरिष्ठ अधिकारियों का सम्मान करेंगे। जनता की समस्या के समाधान को सर्वोपरी रखेंगे।
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