पितृपक्ष रविवार से शुरू हो गया है, यह 25 सितंबर तक रहेगा। पितृ दोष से मुक्ति और पितरों का आशीर्वाद लेने के लिए श्राद्ध पक्ष का खास महत्व है। वैसे तो भाद्रपद पूर्णिमा के साथ श्राद्ध शुरू हो गया है, लेकिन जिन लोगों को पितरों की मृत्यु की तिथि नहीं मालूम है, वे अमावस्या के दिन श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।
आगरा में पितृ पक्ष के पहले दिन यमुना के बल्केश्वर घाट पर श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया। बाह के यमुना घाट पर पिंडदान हुआ। उधर, कासगंज जिले में गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। दूरदराज से श्रद्धालु पितरों के श्राद्ध के लिए यहां पहुंच रहे हैं।
आगरा की ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि श्रद्धा से कुछ देना ही श्राद्ध कर्म कहलाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष के दौरान पितरों का आगमन धरती पर वायु के रूप में होता है और वे जीव-जंतुओं के माध्यम से आहार ग्रहण करते हैं। अत: इस दौरान जीव-जंतुओं को भोजन कराया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।