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राष्ट्रपति ने जर्मनी की 'सुदेवी दासी' को दिया पद्मश्री सम्मान, 40 वर्षों से कर रही हैं गोसेवा

Sun, 17 Mar 2019 11:58 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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'सुदेवी दासी' को राष्ट्रपति ने दिया पद्मश्री सम्मान,
ब्रजभूमि पर निस्वार्थ भाव से गोसेवा कर रहीं जर्मनी की फ्रेडरिक इरिना ब्रूनिंग 'सुदेवी दासी' को राष्ट्रपति भवन में शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री सम्मान प्रदान किया। पद्म सम्मान पाकर सुदेवी दासी का चेहरा खुशी से खिल उठा। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। सुदेवी दासी मथुरा के राधाकुंड में 40 वर्षों से बीमार और असहाय गोवंश की सेवा कर रही हैं। उनकी कहानी गोसेवा की अद्भुत मिसाल है।
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गोशाला में गायों के साथ सुदेवी दासी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
फ्रेडरिक इरिना ब्रूनिंग उर्फ सुदेवी दासी दिल्ली स्थित जर्मनी के दूतावास में कार्यरत पिता डेट्रिच ब्रूनिंग और मां ओजोला ब्रूनिंग की इकलौती संतान हैं। इरिना फ्रेडरिक ब्रूनिंग वैभवपूर्ण जीवन छोड़ बीमार और असहाय गोवंश की सेवा कर रही हैं। भारत सरकार ने इसके लिए ही उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है।  वो वर्ष 1978 में जर्मनी से ब्रज दर्शन के लिए आई थीं। वर्ष 1981 में राधाकुंड पहुंचीं। इस पावन पर भूमि आकर इरिना इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने गुरु दीक्षा के बाद अपना नाम सुदेवी दासी रख लिया। इसके बाद यहां की होकर रह गईं।
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गोशाला में गायों के साथ सुदेवी दासी (फाइल)
सुदेवी दासी ने बताया कि ब्रज भ्रमण के दौरान उन्होंने सड़क किनारे एक बिछड़ को तड़पते देखा। यह देख उन्हें काफी तकलीफ हुई। इस दृश्य ने उनके जीने का मकसद बदल दिया। उन्होंने बेसहारा व बीमार गोवंश की सेवा करने का संकल्प किया। सुदेवी दासी ने राधाकुंड स्थित कौनहाई गांव में जमीन खरीद कर राधा सुरभि गोशाला का निर्माण करवाया। इसमें 1500 से अधिक गोवंश हैं। इनमें से करीब 800 गाय घायल एवं बीमार हैं। जिनका गोशाला में उपचार किया जा रहा है। 

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गोशाला में गायों के साथ सुदेवी दासी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
सुदेवी जर्मनी स्थित अपनी पैतृक संपत्ति के किराये से आने वाली धनराशि और दानदाताओं के सहयोग से गोशाला का संचालन कर रही हैं। गोशाला में घायल, बेसहारा, असहाय, गोवंश को लाकर उनका पालन पोषण एवं उपचार किया जाता है। बीमार और घायल गोवंश को लाने के लिए गोशाला की दो एंबुलेंस भी हैं। सुदेवी गोशाला का खर्च खुद वहन करती हैं। सुदेवी दासी आज भी कच्ची झोपड़ी में रहकर गोवंश की सेवा कर रही हैं। वहीं इस गोशाला से करीब 70 परिवारों का पालन पोषण चल रहा है। 
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गोशाला में गायों के साथ सुदेवी दासी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
पद्मश्री सम्मान मिलने पर सुदेवी दासी ने कहा कि वो बेहद खुश हैं। उन्हें सेवा और तपस्या का फल मिला है। उन्होंने कहा कि वो यहां रहकर पूरे जीवन गोसेवा करना चाहती हैं। बता दें कि महिला दिवस पर सुदेवी दासी की गोसेवा को लेकर अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर को प्रकाशित किया।
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