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'नीरज' का आखिरी कारवां: चलता हूं, अभी चलता हूं, एक गीत और जरा झूम के गा लूं तो चलूं

Sat, 21 Jul 2018 06:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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'नीरज' का आखिरी कारवां - फोटो : अमर उजाला
चिर निद्रा में लीन हुए महाकवि गोपाल दास नीरज की अंतिम यात्रा राजकीय सम्मान के साथ निकाली गई। उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए उनके दीवाने उमड़ पड़े। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, सपा नेता शिवपाल यादव, कवि कुमार विश्वास, सुरेंद्र शर्मा, अरुण जेमिनी, तेज नारायण बेचैन, उदय प्रताप सहित बड़ी संख्या में लोग भावभीनी श्रद्धांजलि देने आए। हर आंख नम थी, हर चेहरे पर गम था।
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'नीरज' का आखिरी कारवां: चलता हूं, अभी चलता हूं, एक गीत और जरा झूम के गा लूं तो चलूं

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'नीरज' का आखिरी कारवां - फोटो : अमर उजाला
पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित नीरज ने गुरुवार को एम्स में अंतिम सांस ली थी। उनके पार्थिव शरीर को एम्स से शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे आगरा केबल्केश्वर स्थित उनकी दिवंगत पत्नी मनोरमा शर्मा के आवास पर लाया गया। यहां लगभग ढाई घंटे अंतिम दर्शन के लिए रखा गया।
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'नीरज' का आखिरी कारवां - फोटो : अमर उजाला
शब्दों के जादूगर के अंतिम दर्शन को डीएम, एसएसपी सहित जिले के तमाम अफसर भी पहुंचे। उन्होंने नीरज को भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की। वहीं कवि कुमार विश्वास ने कहा कि नीरज लोकप्रियता का पैमाना थे। उनके गीतों पर नेहरूजी झूमे और अटलजी भी, देवानंद भी और राजकपूर भी।

'नीरज' का आखिरी कारवां: चलता हूं, अभी चलता हूं, एक गीत और जरा झूम के गा लूं तो चलूं

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'नीरज' का आखिरी कारवां - फोटो : अमर उजाला
कुमार विश्वास ने बताया कि नीरज जी मृत्यु के दूत से भी ऐसे बात करते थे, जैसे हमसे और आपसे। कहते थे, कुंडली देख ली है, 100 वर्ष तक जीऊंगा। मंचों से नीरज जी कहते थे कि चलता हूं, अभी चलता हूं, गीत एक और जरा झूम के गा लूं तो चलूं।
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'नीरज' का आखिरी कारवां - फोटो : अमर उजाला
उनके देह के निकट ही उनके गीत और गजल गूंजते रहे। लगभग साढ़े ग्यारह बजे आवास से एनएच-2 तक उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। एससी आयोग के अध्यक्ष व सांसद राम शंकर कठेरिया, विधायक जगन प्रसाद गर्ग, मेयर नवीन जैन, सपा नेता शिवपाल यादव, कवि रमेश मुस्कान और पवन आगरी भी श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए पहुंचे। 
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'नीरज' का आखिरी कारवां - फोटो : अमर उजाला
शब्दों के जादूगर गोपाल दास नीरज को अंतिम विदाई देने के लिए खास रथ तैयार कराया गया था, लेकिन इसमें पार्थिव देह नहीं रखी जा सकी। नीरज के बेटे मिलन प्रभात पिता की देह को अपने साथ अलीगढ़ ले गए। प्रभात का कहना था कि अलीगढ़ में भी पिता के प्रशंसक अंतिम दर्शन के लिए इंतजार कर रहे हैं।
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