अमर उजाला और आईआईएमटी यूनिवर्सिटी के भविष्य ज्योति कार्यक्रम में यूपी बोर्ड, सीबीएसई और सीआईएससीई के 350 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को मेडल और प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने छात्रों को करियर चयन, सकारात्मक सोच और मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य के महत्व पर मार्गदर्शन दिया।
एकाग्रता, निरंतरता और कड़ी मेहनत। इन्हीं मंत्रों से छात्र-छात्राओं ने सफलता का आसमां छू लिया। ऐसे ही होनहारों को अमर उजाला और आईआईएमटी यूनिवर्सिटी ने केंद्रीय हिंदी संस्थान के अटल बिहारी वाजपेयी अंतरराष्ट्रीय सभागार में भविष्य ज्योति कार्यक्रम का आयोजन कर मेडल-प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों की काउंसलिंग कर कॅरिअर की आगे की राह दिखाई।
समारोह में इंटरमीडिएट पास कर चुके यूपी बोर्ड, सीबीएसई और सीआईएससीई के 350 से अधिक मेधावियों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय, विशिष्ट अतिथि संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा राकेश कुमार, डीसीपी यातायात सोनम कुमार और सीबीएसई के शहर समन्वयक डॉ. आरके पांडेय ने इन्हें मेडल और प्रशस्तिपत्र दिए। गले में मेडल और हाथों में प्रमाणपत्र पाकर मेधावियों के चेहरे खिल गए। विशेषज्ञों ने मेधावियों की कॅरिअर काउंसलिंग करते हुए उनकी उलझनों का समाधान भी किया। समारोह में 10 स्कूलों के 20 शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। संचालन अमित सूरी ने किया।
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डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बच्चों को चुनने दें कॅरिअर, अभिभावक करें सहयोग
मुख्य अतिथि डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने मेधावियों से कहा कि एक-डेढ़ दशक पहले माता-पिता के सपने पूरा करने का बच्चों पर जोर रहता था। कई बार असफल होने पर दूसरा कॅरिअर चुन लेते। उन्होंने थ्री इडियट फिल्म के उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसा करो कि सफलता आपके पीछे आए। विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पिता क्रिकेट में नाम कमाना चाहते थे। उनका सपना वैभव ने पूरा किया। इसके लिए वैभव ने कड़ी मेहनत कर उसे ही अपना लक्ष्य बना लिया। यही संदेश है जो भी तय करें तो सबसे बेहतर बनने की कोशिश करें। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों को कॅरिअर चुनने की छूट दें और उसे पूरा कराने में सहयोग करें।
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भविष्य ज्योति
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अनुशासित-संस्कारित बनें छात्र-छात्राएं
विशिष्ट अतिथि राकेश कुमार ने कहा कि जरूरी नहीं कि डॉक्टर, आईपीएस, आईएएस नहीं बन पाए तो आपमें मेधा की कमी है। ऐसे में जिस कॅरिअर को चुनें उसमें बेहतर करें। उन्होंने मेधावियों से अनुशासन और संस्कारवान बनने की सीख दी। उन्होंने शिक्षक और अभिभावकों की सुनने और सम्मान करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यही हैं जो आपके सफल होने पर खुश होते हैं।
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मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य भी जरूरी
सीबीएसई के शहर समन्वयक डॉ. आरके पांडेय ने मेधावियों से कहा कि सफल होने के लिए पढ़ाई ही जरूरी नहीं। इसके लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होना जरूरी है। ऐसे में व्यायाम करें और फिट रहें। मानसिक सेहत ठीक करने के लिए हॉबी विकसित करें।
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असफलता पर निराश न हों, सकारात्मक सोचें
आईआईएमटी समूह के एमडी डॉ. मयंक अग्रवाल मेधावियों को सकारात्मक सोच का संदेश दिया। कहा कि जरूरी नहीं कि मनमाफिक सफलता मिले लेकिन इससे निराश होने की जरूरत नहीं है। सकारात्मक सोचें और फिर से सपनों को पूरा करने के लिए पूरी दमखम से जुट जाएं, निश्चित ही मुकाम मिलेगा।
क्षमता पहचान कर तय करें लक्ष्य
आईआईएमटी यूनिवर्सिटी के प्रति कुलपति प्रो. पंकज मिश्रा ने मेधावियों से कहा वे अब कॅरिअर चुनने के लिए व्यापक पाठ्यक्रम हैं। इनमें बेहतर कर मनमाफिक मुकाम पाया जा सकता है। ऐसे में अपनी क्षमता को पहचानते हुए लक्ष्य तय करें, इसको पाने के लिए मेहनत करें।