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तस्वीरें: नौनिहालों के सिर पर मंडरा रहा खतरा, शिक्षा विभाग के अफसर बेखबर

Fri, 19 Jul 2019 11:57 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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जर्जर इमारत की टूटती दीवार से निकलती छात्रा - फोटो : अमर उजाला
शिक्षा विभाग भी स्कूलों के जर्जर भवनों पर नहीं चेत रहा है। बारिश के मौसम में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद आगरा जिले के कई परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में जर्जर भवन खड़े हैं। इन स्कूलों के प्रधानाध्यापक विभाग को पत्र लिख रहे हैं, लेकिन इन भवनों को ध्वस्त नहीं कराया जा रहा है।
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जर्जर भवन के पास पढ़ाई करते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
पिछले शैक्षणिक सत्र में फतेहपुर सीकरी के एक विद्यालय में तीन विद्यार्थी निष्प्रयोज्य विद्यालय भवन में खेल रहे थे। दीवार गिरने से तीनों चोटिल हो गए थे। जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जबकि वर्ष 2016 में बाउंड्रीवाल गिरने से एक विद्यार्थी की मौत भी हो गई थी। इसके बाद भी विभाग इन विद्यालय भवनों को ध्वस्त नहीं करा रहा है।
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स्कूल के पुराने भवन के पास खड़े बच्चे - फोटो : अमर उजाला
प्राथमिक विद्यालय, कंसखार, बीमा नगर में 43 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। नया विद्यालय भवन बने करीब 10 वर्ष हो गए। इसके ठीक सामने करीब छह से सात मीटर की दूरी पर ही पुराना जर्जर भवन है, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। प्रधानाध्यापिका सोनाली कश्यप के मुताबिक वो इसे ध्वस्त कराने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी को पत्र लिख चुकी हैं।  

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निष्प्रयोज्य विद्यालय भवन - फोटो : अमर उजाला
प्राथमिक विद्यालय, बाल गोवर्धन दास, सोंठ की मंडी में 16 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। एक कक्ष में पढ़ाई होती है। बगल में निष्प्रयोज्य विद्यालय भवन है। विद्यार्थियों पर नजर रखनी पड़ती है कि वह भवन की तरफ न जाएं। प्रधानाध्यापिका ने भवन को ध्वस्त कराने के लिए कई बार खंड शिक्षा अधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा है। 
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निष्प्रयोज्य विद्यालय भवन में पढ़ाई करते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कन्या ईदगाह में दो भवन निष्प्रयोज्य है। ये कभी भी गिर सकते हैं। प्रधानाध्यापिका निधि श्रीवास्तव के मुताबिक करीब 10 बार विभाग को पत्र भेजा जा चुका है। लेकिन अब तक भवन को ध्वस्त नहीं कराया जा रहा है। 
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निष्प्रयोज्य विद्यालय भवन के पास से गुजरते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
बेसिक शिक्षा अधिकारी ओमकार सिंह का कहना है कि कुछ विद्यालयों के पत्र मिले हैं। निष्प्रयोज्य भवन को ध्वस्त कराने की मांग की गई है। इस संबंध में मुख्यालय से भवनों को ध्वस्त कराने के लिए अनुमति मांगी गई है। 

जबकि यूटा के जिलामंत्री राजीव वर्मा का कहना है कि कई बार अधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा चुका है। कोई बड़ा हादसा हो सकता है। स्कूलों की सूचना पर बीएसए को इंजीनियर से जांच कराकर निष्प्रयोज्य विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश करने होते हैं।
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