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मथुरा: 20 फीट गहरे बोरवेल में गिरी नीलगाय, वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने बचाया

Sat, 06 Mar 2021 12:09 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा/आगरा
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बोरवेल में नीलगाय - फोटो : Wildlife SOS
खुले कुएं और बोरवेल वन्यजीवों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। ऐसी ही एक घटना मथुरा जिले के गोवर्धन क्षेत्र में हुई है। गोवर्धन क्षेत्र में 20 फीट गहरे बोरवेल में नीलगाय गिर गया। उसे वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट ने बचाया। मौके पर ही उसे चिकित्सीय परीक्षण एवं उपचार दिया गया। इसके बाद नीलगाय को वापस जंगल में छोड़ दिया गया।
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नीलगाय - फोटो : Wildlife SOS
गोवर्धन क्षेत्र के देवसेरस गांव के ग्रामीणों ने शुक्रवार की सुबह एक नीलगाय को 20 फीट गहरे बोरवेल में गिरा पाया। उन्होंने इसकी सूचना वाइल्डलाइफ एसओएस की दी। वन्यजीव संरक्षण संस्था से दो सदस्यीय बचाव दल को मौके पर भेजा गया। दो घंटे तक चले बचाव अभियान में, टीम ने सिंथेटिक हार्नेस की मदद से नीलगाय को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला। 
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नीलगाय - फोटो : Wildlife SOS
नीलगाय को चिकित्सीय परीक्षण के बाद दोबारा जंगल में छोड़ दिया गया। नीलगाय या ब्लू बुल एशिया में पाए जाने सबसे बड़े एंटीलोप हैं और भारतीय उपमहाद्वीप में आमतौर पर पाए जाते हैं। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-III के तहत संरक्षित है।

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नीलगाय - फोटो : Wildlife SOS
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि खुले कुएं एवं बोरवेल न केवल वन्यजीवों के लिए बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए भी बहुत बड़ा खतरा हैं। इन्हें ढंकने की तत्काल आवश्यकता है, विशेष रूप से वो, जो आबादी वाले इलाके में हैं। 
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नीलगाय - फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजुराज एमवी ने बताया कि एक नर नीलगाय अपने तेज सींग की मदद से घातक चोटें पहुंचा सकता है और उनका वजन 100 किलो से अधिक हो सकता है। इसलिए प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को ही ऐसे बचाव अभियानों को अंजाम देना चाहिए। हमारी रेस्क्यू टीम प्रशिक्षित है और ऐसी परिस्थितियों को अच्छे से संभालना जानती है।
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