घड़ियालों, मगरमच्छ के घर चंबल नदी में गुरुवार को 400 नन्हे कछुए नदी के पानी में पहुंचे। बाह रेंज के हरलालपुरा में हैचिंग के बाद 150 और पिनाहट में 250 कछुए चंबल सेंक्चुरी के कुनबे में शामिल हुए। आईसीयूएन की रेड कैटेगरी में शामिल बटागुर, सुंदरी समेत दुर्लभ प्रजाति के इन कछुओं के चंबल में पहुंचने के बाद वन्य जीव विभाग ने नदी में निगरानी बढ़ा दी है।
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नन्हें कछुए
- फोटो : अमर उजाला
चंबल सेंक्चुरी में नेशनल चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट के तहत घड़ियाल, मगरमच्छ के साथ ही कछुओं का भी संरक्षण हो रहा है। फरवरी और मार्च में कछुओं ने चंबल नदी के किनारे बालू में अंडे दिए थे, जिन्हें वन्य जीव विभाग ने चिन्हित कर यहां जंगली जानवरों से बचाने के लिए जालियां लगा दी थीं। जीपीएस से लोकेशन ट्रेस कर निगरानी की गई। मई में हैचिंग महीना शुरू होते ही जाली हटा दी गई। एक घोंसले में 8 से 30 अंडे यहां मिले हैं। गुरुवार को हरलाल पुरा और पिनाहट में नन्हें कछुए जन्म लेने के बाद बालू पर सरकते हुए चंबल नदी में पहुंच गए।
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चंबल नदी में स्पूनबिल पक्षी (फाइल फोटो)
चंबल नदी के किनारे रेत में दुर्लभ प्रजाति के बटागुर कछुए जन्म ले रहे हैं। इनके अलावा सुंदरी, साल, धोढ़, धमोका, पचेड़ा, कटहवा, इंडियन स्टार कछुओं की हैचिंग जारी है। चंबल में कछुओं की सात दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण किया जा रहा है। यह सभी आईसीयूएन की रेड कैटेगरी में शामिल हैं। यह साफ पानी में रहते हैं और नदी की घास तथा छोटी मछलियों का भोजन करते हैं। रात के अंधेरे में इनकी हैचिंग होती है।
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चंबल
- फोटो : अमर उजाला
आनंद कुमार, डीएफओ नेशनल चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट का कहना है कि चंबल नदी का पानी साफ है जो इन दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का भा रहा है। बटागुर समेत कई प्रजातियों के कछुओं की हैचिंग जारी है। इस बार इनका कुनबा बढ़ने की उम्मीद है
चंबल नदी की रेत में अंडे से निकलते नन्हे कछुए
- फोटो : अमर उजाला
चंबल नदी में मौजूद सुंदरी कछुए पर तस्करों की निगाह रहती है। दरअसल, चारों पंजों में इसके 20 नाखून होते हैं, जिसका इस्तेमाल तांत्रिक तंत्र-मंत्र में कर रहे हैं। इसी कारण यह तस्करों की निगाह में है। दीवाली के नजदीक चंबल नदी में इसी कारण वन्य जीव विभाग निगरानी बढ़ा देता है।