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...तो टैक्स के दायरे में आएंगे घर के पालतू कुत्ते, पार्षद ने दिया मेयर को सुझाव

Thu, 09 Jan 2020 11:22 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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आगरा नगर निगम
नगर निगम क्षेत्र में चार लाख घर और संपत्तियां हैं, लेकिन टैक्स महज 40 हजार से ही मिल रहा है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की तरह केवल दस फीसदी संपत्तियों से ही हाउस टैक्स वसूला जा रहा है। नगर निगम सदन के विशेष बजट अधिवेशन में मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी ने जब यह आंकड़े पेश किए तो पार्षदों ने सवाल खड़े कर दिए। पार्षदों ने हाउस टैक्स के अलावा रोड कटिंग, मलबा शुल्क, विज्ञापन से कमाई और किराए से आमदनी में आ रही कमी को लेकर अधिकारियों पर लापरवाही और मिलीभगत के आरोप लगाए। 
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नगर निगम के बजट अधिवेशन में बोलते नगरआयुक्त साथ में मेयर व अन्य - फोटो : अमर उजाला
बजट अधिवेशन में पास किए गए पुनरीक्षित बजट में सदन ने हाउस टैक्स में 60 करोड़ रुपये के लक्ष्य की जगह 75 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया। 31 दिसंबर तक निगम महज 30 करोड़ रुपये ही वसूल सका है। महज तीन महीने का समय बाकी है, इसमें अब 45 करोड़ रुपये निगम के टैक्स इंस्पेक्टरों को वसूलने होंगे। इसके लिए शहर में हर वार्ड में टैक्स जमा करने के लिए कैंप लगाए जाएंगे। मेयर नवीन जैन ने पार्षदों के सुझाव पर सरलीकरण के निर्देश दिए। पार्षदों ने हाउस टैक्स में विसंगतियों को लेकर कई मामले पेश किए, जिन्हें अपर नगर आयुक्त विनोद गुप्ता को सौंप दिया गया।
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dogs
नगर निगम के बजट अधिवेशन में पार्षद रवि शर्मा ने मद संख्या 110-05-01 में कुत्तों पर टैक्स में सुझाव दिया कि पालतू कुत्तों पर एक हजार रुपये का टैक्स लगाया जाए। इससे करीब एक करोड़ रुपये की आय हो सकती है। जिन लोगों ने कुत्तों को पाल रखा है, वह नगर निगम की सड़कों, पार्कों में घुमाने के नाम पर गंदगी फैला रहे हैं, जिसे नगर निगम कर्मचारी साफ करते हैं। मेयर नवीन जैन ने भी इस सुझाव को लेकर अधिकारियों से गंभीरता से विचार के लिए कहा। पार्षद ने कहा कि महंगे पालतू कुत्ते लग्जरी में है, ऐसे में इन्हें पालने वालों पर एक हजार रुपये सालाना टैक्स लगाया जाना चाहिए।

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मेयर नवीन जैन, नगर आयुक्त अरूण प्रकाश व अन्य - फोटो : अमर उजाला
अधिवेशन में पार्षदों ने मलबा शुल्क का लक्ष्य दो करोड़ रुपये होने के बाद केवल 5.57 लाख रुपये मिलने पर हंगामा किया। पार्षदों ने सवाल उठाए कि जब शहर की हर सड़क, गली में भवन निर्माण सामग्री रखी है, तो मलबा शुल्क क्यों नहीं वसूला गया। आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा नक्शा पास करने पर एनओसी नगर निगम द्वारा दी जाती है, तभी मलबा शुल्क जमा कराया जाता है, फिर केवल ढाई फीसदी ही वसूली कैसे हो पाई। मेयर नवीन जैन ने चारों जोन के अधिशासी अभियंताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि पुराने शहर में मल्टीस्टोरी निर्माण और पुराने भवनों को तोड़कर किए जा रहे नव निर्माण में मलबा मिलने पर मलबा शुल्क वसूलें।
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नगर निगम के सदन में मौजूद पार्षद - फोटो : अमर उजाला
दूर संचार कंपनियों, ग्रीन गैस, जल निगम, टोरंट पावर, स्मार्ट सिटी ने पूरे शहर की सड़कों की खोदाई कर दी है, लेकिन रोड कटिंग पर जुर्माने के रूप में केवल 3.60 लाख रुपये ही वसूले जा सके हैं। सदन में इसके लिए 6 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य दिया था, पर आधा फीसदी ही जुर्माना वसूला जा सका। पार्षदों ने रोड कटिंग मद में आई कमी पर लक्ष्य घटाकर पांच करोड़ करने का प्रस्ताव रखा, जिसे मेयर ने मंजूरी दे दी। यही हाल पार्किँग का है, जिसमें पांच करोड़ के लक्ष्य की तुलना में केवल 85 लाख रुपये की कमाई हो पाई है।
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जिले में विकसित होगा कान्हा उपवन - फोटो : amar ujala
पुनरीक्षित बजट में केवल पॉलिथीन, स्वच्छता, कोयला जलाने पर जुर्माने से कमाई बढ़ी है। इसमें नगर निगम ने 10 लाख रुपये का लक्ष्य रखा था, पर दिसंबर तक 25 लाख रुपये पॉलिथीन पर जुर्माने से और अन्य पर जुर्माने से 15 लाख की जगह 16.66 लाख रुपये आ चुके हैं। ऐसे में पॉलिथीन पर जुर्माने से कमाई का लक्ष्य बढ़ाकर 50 लाख और अन्य जुर्माना बढ़ाकर 35 लाख रुपये कर दिया गया है। कान्हा उपवन पर खर्च भी पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 6 करोड़ रुपये, पौधरोपण पर दो करोड़ की जगह पांच करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव पास कर दिया गया।
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अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त - फोटो : अमर उजाला
पार्षद वर्षा शर्मा, शिरोमणि सिंह, ओम प्रकाश धाकड़ ने कहा कि नमक की मंडी में सराफा की सात हजार दुकानें हैं, लेेकिन उनसे घरों का नाम मात्र का टैक्स मिल रहा है। इन पर कॉमर्शियल टैक्स लगना चाहिए, जिससे निगम की आय बढ़ेगी। इन क्षेत्रों के इंस्पेक्टरों की जांच करने और लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की मांग की गई। सदरभट्टी, हींग की मंडी, रावतपाड़ा, लुहार गली, किनारी बाजार, दरेसी, चौबे जी का फाटक, धाकरान, मंटोला में पुराने मकान  तोड़कर कॉमर्शियल कांप्लेक्स बनाने पर मलबा शुल्क और दुकानों पर कॉमर्शियल टैक्स वसूलने के लिए नगर आयुक्त को निर्देश दिए गए।
 
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