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शब-ए-बरआत: इबादत में गुजारी पूरी रात, किसी ने गुलपोशी की, तो किसी ने जलाई अगरबत्ती

Sun, 21 Apr 2019 09:40 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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दरगाह पर कई गई सजावट - फोटो : अमर उजाला
आगरा में शब-ए-बरआत पर इबादतगाहों में पहुंचकर मुस्लिमों ने अपने बुजुर्गों की मगफिरत की दुआ मांगी। पूरी रात इबादत का दौर चला। जलसों में मौलाना और उलमा ने इबादत की रात पर तफ्सील से रोशनी डाली। लोगों ने कब्रिस्तानों में पहुंचकर फातिहा पढ़ा। अगरबत्ती जलाईं और गुलपोशी की गई। युवाओं ने आतिशबाजी की। 
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कब्रितान में इबादत करते मुस्लिम समाज के लोग - फोटो : अमर उजाला
पचकुंइयां कब्रिस्तान कमेटी की ओर से कब्रिस्तान में हुए जलसे में फिरोजाबाद से आए मौलाना आदम मुस्तफा ने खिताब किया। सदारत मुफ्ती अब्दुल सत्तार ने की। निजामत कारी मोईनउद्दीन अकबरी ने की। कारी जैद खां, हाजी अफजाल, मोहम्मद जहीरउद्दीन बाबर, हाजी मोहम्मद शहजाद, मोहम्मद हसीन शम्सी, यामीन वारसी, अदनान कुरैशी, हाजी मोहम्मद कदीर का सहयोग रहा। यहां पूरी रात लोगों ने कब्रों पर फातिहा पढ़ा। मोमबत्ती जलाईं और गुलपोशी की। मिस्कीनों को जकात बांटी। 
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कब्रितान में मोमबत्ती जलाते हुए बच्चे - फोटो : अमर उजाला
ऑल इंडिया मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी की ओर से सदरभट्टी रोड पर जलसा हुआ। इसे मौलाना अब्दुल्ला चतुर्वेदी ने खिताब किया। मंटोला तिराहे पर हुए जलसे में इसमें मौलाना इनाम अहमद ने दुआ करवाई। इसी तरह न्यू आगरा स्थित कब्रिस्तान में भी शाम से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जोकि देर रात तक चलता रहा। मदिया कटरा, शहीद नगर, सराय ख्वाजा में भी जलसे हुए।

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सदर भट्टी रोड आयोजित जलसे को संबोधित करते मौलाना - फोटो : अमर उजाला
शाहगंज स्थित शिया वक्फ कब्रिस्तान में रोशनी की गई। मुतवल्ली मोहम्मद अहमद जाफरी ने व्यवस्थाएं संभाली। लोगों ने फातिहा दिलवाई। शिया समुदाय के लोगों ने इबादत की। न्यू आगरा स्थित मजार शहीद-ए-सालिस पर मीलाद (महफिल) का आयोजन किया गया। सदारत कर रहे मौलाना सैयद अली गौहर जैदी ने बताया कि आज इस्लाम के इमामात के आखिरी इमाम हजरत मेहंदी की योमे विलादत है। मुतवल्ली सैयद जफर रिजवी ने शुक्रिया अदा किया।
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कब्रितान में अगरबत्ती लगाते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
दरगाह और मस्जिदों में दुआ मांगी गई कि या अल्लाह इस दुनिया में जो भी परेशान हाल है, उनकी परेशानियों को खत्म कर उन्हें खुशहाल जिंदगी दे। या अल्लाह हमारे और हमारे बुजुर्गों के गुनाहों को बख्श दे। इस दुनिया ने जो इंतकाल फरमा चुके हैं, उनकी मगफिरत कर उन्हें जन्नत नसीब अता कर। या इलाही अपने महबूब नबी-ए-करीम केसदके में हमारी जायज मांगों को कुबूल फरमा। या अल्लाह जो बीमार हैं, उन्हें शिफा अता फरमा। 
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