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हिंदुओं की आस्था महका रहे 'रहीम के परिवार', तपती आग में लिख रहे 'सर्वधर्म सदभाव की गाथा'

Thu, 06 Feb 2020 09:46 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
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कांवड़ के लिए गंगाजली तैयार करते मुस्लिम लोग - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि की तैयारियों में जुटे श्रद्धालुओं की आस्था को मुस्लिम परिवारों के हाथों का हुनर और भी महकाएगा। सोरों में कांवड़ के लिए तैयार की जाने वाली गंगाजली (जिसमें गंगाजल भरा जाता है) उसे कादरवाड़ी गांव के मुस्लिम परिवार अभी से तैयार करने में जुट गए हैं। गंगाजली तैयार करना इन परिवारों के लिए रोजी-रोटी तो है ही, सर्वधर्म सदभाव के समर्पण की सराहनीय गाथा भी है। तपती आग में कांच को फूंक से आकार देकर बोतलनुमा गंगाजली तैयार करना इनका बड़ा हुनर है।

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कांवड़ तैयार करता कारीगर - फोटो : अमर उजाला
तीर्थनगरी में माघ पूर्णिमा नौ फरवरी से शुरू होने वाले महाशिवरात्रि मेले की तैयारी चल रही है। प्रदेश के अन्य जनपदों के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि के कांवड़िये तीर्थनगरी के लहरा घाट से गंगाजल भरकर अपने क्षेत्रों के शिवालयों तक पैदल यात्रा करते और महाशिवरात्रि पर भोले का गंगाजल से अभिषेक करते हैं। 
 

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गंगाजली को आकार देने में जुटे कारीगर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
कांवड़िये लहरा घाट से जिन कांच की गंगाजली में गंगाजल भर कर ले जाते हैं, उन्हें कादरवाड़ी के मुस्लिम कारीगर दिन-रात तपती भट्ठियों के आगे काम करने के बाद तैयार करते हैं। इस समय कादरवाड़ी में कई भट्ठियां धधक रही हैं। कारीगरों के मुताबिक गंगाजली बनाने का काम दीपावली से शुरू होता है और महाशिवरात्रि तक चलता है।
 

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गंगाजली को आकार देने में जुटे कादरवाड़ी के परिवार - फोटो : अमर उजाला
गंगाजली बनाने में जुटे कादरवाड़ी के लोग कांच के फिरोजाबाद शहर तक अपने हुनर के लिए जाने जाते हैं। वह फिरोजाबाद से कच्चा कांच लाते हैं और फिर कादरवाड़ी में भट्ठियों में कच्चे कांच को आकार देकर गंगाजली के रूप में ढालते हैं। इस तरह गंगाजली का यह काम फिरोजाबाद से भी जुड़ा है।
 

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गंगाजली के कारीगर - फोटो : अमर उजाला
8 मुस्लिम परिवार गंगाजली तैयार करने में जुटे,  25 हुनरमंद कारीगर प्रतिदिन गंगाजली बनाने में जुटे, 300 गंगाजली एक कारीगर एक दिन में करता है तैयार। 

कई पीढ़ियों से कर रहे काम
यह काम सात पीढ़ियों से हो रहा है। व्यापारी लोग एडवांस में धनराशि दे जाते हैं और फिरोजाबाद से कच्चा माल लाकर वह गंगाजली तैयार करते हैं।
- फारूख, कारीगर।

- यह काम साल के सिर्फ तीन महीने तक ही चलता है, बाकी के दिनों में या तो खेतों पर मजदूरी करते हैं या बड़े शहरों में जाकर कोई मेहनत मजदूरी का काम करते हैं। - असलम, कारीगर।
 
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