मुलायम सिंह यादव को कार्यकर्ताओं से गहरा लगाव था। उनसे बहुत आत्मीयता से मिलते थे। याददाश्त इतनी तेज थी कि सबको नाम से जानते थे और भीड़ में पहचान लेते थे। मुलायम सिंह वो नाम है जिसने समाजवाद किताबों में नहीं पढ़ा, संघर्ष से इसका सबक पढ़ा। यही वजह है कि वह मजदूर, किसान और गरीबों के नेता बन गए। सैफई जैसे एक छोटे से गांव में जन्मे। गरीब किसान परिवार था। इसलिए उन्हें गरीबों में अपना अक्स नजर आता था। जब देश में डॉ. लोहिया ने गैर कांग्रेस सरकारों का प्रयोग किया, तो मुलायम अगुवा रहे। हालांकि लोहिया मानते थे कि उनका यह प्रयोग असफल रहा। वह चरित्र भेद की राजनीति करना चाहते थे, जो नहीं हो सकी।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजी लाल सुमन ने बताया कि 1960 का वक्त आगरा में सोशलिस्ट पार्टी का था। 1957 में श्रीराम चौहान व विश्वेश्वरानंद जीते। 1962 में चौधरी मुल्तान सिंह और शिव चरन जीते। 1967 में हुकुम सिंह जीते। सभी सोशलिस्ट नेता थे।
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रामजीलाल सुमन
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि मैं भी तब सोशलिस्ट पार्टी में था। वर्ष 1977 में पहली बार मुलायम सिंह के संपर्क में आया। उस समय फिरोजाबाद नया जिला बना था। मैंने फिरोजाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत गया।
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रामजीलाल सुमन
पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजी लाल सुमन ने बताया कि इसके बाद मैं 1989, 1999 और 2004 में सांसद बना। 1991 में केंद्र में जब पीवी नरसिंह राव की सरकार बनी तो मैं श्रम एवं कल्याण मंत्री रहा।
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मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
मुलायम सिंह ने सबसे बड़ा काम 1992 में किया, जब उन्होंने समाजवादी पार्टी बनाई। तब देश में समाजवादी विचार कमजोर पड़ रहा था। समाजवादी लोग अलग-थलग हो रहे थे। मुलायम ने उनको इकठ्ठा किया।
इतना ही नहीं लोगों को एक मंच पर ला खड़ा किया। क्योंकि वं भारतीय समाज के नेता थे। 1999 से 2004 तक मैं और मुलायम दोनों लोकसभा में साथ रहे। तब दोपहर 12 बजे से एक बजे तक शून्यकाल होता था। जिसमें मैं और मुलायम जनहित के सम-सामयिक मुद्दों पर चर्चा करते थे।