मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि रही मैनपुरी ने केवल नेताजी के ही सियासी सफर को उड़ान नहीं दी बल्कि सैफई परिवार की तीन पीढ़ियां इसी मैनपुरी के रास्ते संसद तक पहुंचीं। एक बार नेताजी ने सीट छोड़कर भतीजे धर्मेंद्र यादव को संसद पहुंचाया तो वहीं दूसरी बार पौत्र तेजप्रताप यादव के लिए सीट छोड़ी। दोनों ही बार नेताजी की इच्छा का भी मैनपुरी की जनता ने सम्मान किया और भारी बहुमत से जीत दिलाई।
पहली बार 1996 में समाजवादी पार्टी से मुलायम सिंह यादव मैनपुरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे। तब तक मैनपुरी से उनका नाता गहरा हो चुका था। जनता से भरपूर प्यार मिला और नेताजी मैनपुरी से चुनकर पहली बार लोकसभा पहुंचे। इसके बाद से सपा ने कभी मैनपुरी लोकसभा सीट पर हार का मुंह नहीं देखा। इसी बीच नेताजी ने सैफई परिवार की नई पीढ़ियों को भी लोकसभा भेजने का निर्णय लिया तो बात आई सीट के चुनाव की। नेताजी को मैनपुरी की जनता पर इतना भरोसा था कि उन्होंने आंख बंद करके मैनपुरी को ही चुना।
विज्ञापन
2 of 6
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव
- फोटो : अमर उजाला
यह बात वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव की है। यहां से मुलायम सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी। नेताजी के सीट छोड़ने के बाद उन्होंने उप चुनाव में भतीजे धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारा। विरोधी दलों को लगा कि शायद अब उन्हें यह सीट कब्जाने का मौका हाथ लग गया है, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। नेताजी का जादू चला और धर्मेंद्र यादव ने उपचुनाव में जीत दर्ज की।
विज्ञापन
3 of 6
मुलायम सिंह यादव के साथ तेज प्रताप यादव (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
2009 व 2014 का लोकसभा चुनाव मुलायम सिंह यादव ने खुद ही लड़ा और जीत दर्ज की। लेकिन फिर एक बार 2014 में नेताजी ने मैनपुरी लोकसभा सीट छोड़ दी। इस बार उन्होंने अपने पौत्र तेज प्रताप यादव को मैदान में उतारा। सियासत को शूरमाओं को फिर लगा कि वे अब मैनपुरी का सपाई दुर्ग ढहा सकते हैं, लेकिन यहां भी उनका सपना अधूरा ही रहा।
4 of 6
पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव और उनकी पत्नी राजलक्ष्मी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
तेजप्रताप यादव को भी जनता ने उतना ही प्यार दिया, जितना नेताजी को मिलता था। परिणाम आया तो चार लाख से अधिक वोटों से तेजप्रताप यादव ने जीत दर्ज की। यह मैनपुरी लोकसभा चुनाव में अब तक सबसे बड़ी जीत थी। मैनपुरी के रास्ते ही सैफई परिवार की तीन पीढ़ियों ने संसद का सफर तय किया। चुनावी रथ पर सवारी चाहे किसी की भी रही हो, लेकिन उस रथ के सारथी हमेशा मुलायम सिंह यादव ही रहे।
विज्ञापन
5 of 6
मुलायम सिंह यादव और उनकी भतीजी संध्या यादव
- फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह यादव से शुरू हुअ सैफई परिवार का सियासी सफर अनवरत जारी है। नेताजी के भाई से लेकर पुत्र, भतीजे और पौत्र भी अब सियासत के मंझे हुए खिलाड़ी बन चुके हैं। लेकिन जब बात सैफई परिवार की बेटी के सियासत में कदम रखने की आई तो भी मैनपुरी को ही चुना गया। वर्ष 2015 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मुलायम सिंह यादव की भतीजी और धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या यादव ने मैनपुरी से ही जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और फिर जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुईं।
मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह यादव के की कर्मभूमि मैनपुरी ने सैफई परिवार को कभी भी निराश नहीं किया। इसी के चलते जब 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का निर्णय लिया तो उन्हें भी अपने पिता और नेताजी की कर्मभूमि की ही याद आई। उन्होंने मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और भाजपा प्रत्याशी प्रो. एसपी सिंह बघेल को रिकॉर्ड मतों से पराजित किया। करहल वही सीट है, जहां से नेताजी मुलायम सिंह यादव ने खुद शिक्षा हासिल की और शिक्षण कार्य भी किया।