छोटा कद। गठीला बदन। खेतीबाड़ी और पहलवानी। यही शौक थे मुलायम सिंह यादव के। 18 साल की उम्र में शादी हुई, लेकिन पहला प्यार कुश्ती ही रहा। 1959 में मैनपुरी से आगरा मंडल के कुश्ती चैंपियन बने। 1963 तक अखाड़ों में उनका चरखा दांव मशहूर रहा। यहीं, उन्हें नत्थू सिंह मिले, जिनसे प्रेरित होकर उन्होंने लाल टोपी पहनी और फिर सूबे में सियासी दंगल के बड़े पहलवान बन गए।
प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेता नत्थू सिंह, मुलायम सिंह की कुश्ती पर मुग्ध थे। 1962 में नत्थू सिंह जसवंत नगर से विधायक बने। सैफई में कुश्ती हो रही थी। मुलायम ने चरखा दांव से जैसे ही अपने से दोगुनी उम्र के पहलवान को अखाड़े में चित्त किया, उसे देख नत्थू सिंह उछल पड़े। दौड़कर मुलायम को अखाड़े में ही गोद में उठा लिया। यही, उनका टर्निंग प्वाइंट था, जिसने मुलायम को सियासी दंगल में ला खड़ा किया। 1963 में वह इंटर कॉलेज में प्रवक्ता बन गए, लेकिन राजनीति जारी रही।
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मुलायम सिंह के बाल सखा आनंद जैन
- फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह के बाल सखा रहे आनंद जैन बताते हैं कि 1967 में नत्थू सिंह ने जसवंत नगर की सीट मुलायम के लिए छोड़ी और खुद करहल से चुनाव लड़ा। जसवंत नगर से 1967 में मुलायम पहली बार विधानसभा में पहुंचे। तब उम्र 28 साल थी। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव
- फोटो : अमर उजाला
लोहिया को गुरु मानने वाले मुलायम सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पदचिह्नों पर सफर शुरू किया। किसानों, मजदूरों, दलित व पिछड़ों की सियासत की। 1974 में भारतीय किसान दल (बीकेडी) में आए। 1975 में आपातकाल में 19 महीने जेल में रहे। 1977 में भारतीय लोकदल (बीएलडी) में पहुंचे। 1982 में पहली बार विधान परिषद के सदस्य बने, फिर 1985 में चौधरी चरण सिंह ने लोकदल बनाया।
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पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1989 में मुलायम सिंह जनता दल में शामिल हुए। इसी साल उन्हें पहली बार देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली। 1991 में समाजवादी जनता पार्टी बनीं। 1993 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने खुद की समाजवादी पार्टी बनाई। तब तक मुलायम हिंदी बेल्ट की राजनीति में बड़ी लकीर खींच चुके थे। अखाड़े के पहलवान को सियासी दंगल रास आ रहा था। बड़े पहलवान बन चुके थे।
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मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
जब 1996 में मैनपुरी से सांसद बने तो नाम दिल्ली के सियासी गलियारों में गूंजने लगा। पांच बार मुलायम मैनपुरी से सांसद रहे। दो बार संभल से जीते। वह अकेले ऐसे नेता थे जो 1999 में संभल और कन्नौज की दो सीटों से और फिर 2014 में आजमगढ़ और मैनपुरी की दो सीटों से लोकसभा में पहुंचे थे।
मुलायम सिंह यादव के साथ धर्मेंद्र यादव (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
दो बार ऐसा भी वक्त आया जब मुलायम सिंह यादव प्रधानमंत्री पद के दावेदार बने। इसके अलावा मुलायम को देश में सबसे बड़ा सियासी कुनबा तैयार करने के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने अपने परिवार से 50 से अधिक सदस्यों को सांसद, विधायक, मंत्री, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख व प्रधान बनाया है।