हमने भगवान को तो नहीं देखा, लेकिन मां को देखा है। मां महज एक शब्द या रिश्ता नहीं, पूरी दुनिया है। युग बदले, सदियां बदलीं, नहीं बदली तो सिर्फ मां। तपती धूप में ठंडी छांव का अहसास है मां। लड़खड़ाते कदमों को संभाल लेने का संबल देने का विश्वास है मां। मदर्स डे पर हमने बात की कुछ माताओं से और जाना मातृत्व के महत्व और उसके अहसास को। पढ़िए, बच्चों के प्रति मां के प्यार, दुलार, ममता, करुणा, निश्चल और निस्वार्थ प्रेम के अहसासों को पेश करती रिपोर्ट...
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डॉ. श्वेता सैनी और उनकी बेटी तेजस्वी सैनी
आगरा के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जिला अभिहित अधिकारी डॉ. श्वेता सैनी नौकरी के साथ बेटी की परवरिश भी बखूबी कर रही हैं। बताती हैं कि सुबह लगभग नौ बजे घर से निकलना होता है और शाम को पांच-छह बज जाते हैं। कभी-कभार वीआइपी ड्यूटी और छापे में देर रात तक व्यस्त रहना पड़ता है। इसके बावजूद वो बेटी की पढ़ाई और परवरिश में कमी नहीं आने दी।
उन्होंने बताया कि 2015 में जॉब लगी तब बेटी तेजस्वी सैनी 11 साल की थी और छठवीं कक्षा में पढ़ रही थी। खुद ही उसको ट्यूशन देती हैं। रोजाना दो से तीन घंटे जरूर पढ़ाती हैं। डांस, सिंगिंग के साथ उसके बैडमिंटन समेत अन्य खेल भी खेलती हैं। श्वेता बताती हैं कि बेटियों के लिए मां से बेहतर मित्र कोई नहीं है।
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निधि श्रीवास्तव अपनी बेटियों के साथ
नौकरी में रहते हुए बच्चों की बेहतर परवरिश और उनके लिए समय निकाल पाना आसान नहीं है। मगर, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) निधि श्रीवास्तव एक अफसर होने के साथ-साथ मां का फर्ज भी बखूबी निभा रही हैं। अपने काम के लिए वह जितना समर्पित हैं, उतना ही अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए संजीदा हैं। अपने व्यस्त समय में से अपनी दोनों बेटियों के लिए समय निकाल ही लेती हैं।
निधि की दो बेटियां हैं। बड़ी आमरा कक्षा दस में है तो छोटी सुहाना चौथी कक्षा में है। निधि श्रीवास्तव बताती हैं कि हर साल गर्मियों की छुट्टी में वह बच्चों के साथ घूमने जरूर जाती हैं। उनके पति आरपी सिंह भी पीसीएस अधिकारी हैं।
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अपनी मां के साथ सोनिया शर्मा
इंटरनेशनल शूटर सोनिया शर्मा की सफलता का राज उनकी मां हैं। सोनिया के पिता ठाकुरदास चाहते थे कि सोनिया नेशनल लेवल की शूटर बने। पर तभी सोनिया के पिता का निधन हो गया। पिता के निधन के बाद मां जनक शर्मा ने सोनिया को शूटर बनाने का संकल्प लिया। सोनिया की मां ने उनके लिए पिस्टल की व्यवस्था की।
हर रोज स्टेडियम आकर प्रैक्टिस सीखने का खर्चा भी था। पर मां की प्रेरणा ने कभी हारने नहीं दिया। सन 2017 में थाइलैंड में हुई पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया। इसके साथ ही उनके पास अब तक राज्य स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न शूटिंग चैंपियनशिप के पचास से अधिक मेडल्स हैं। सोनिया का कहना है कि मां की वजह से ही उन्होंने बुलंदियों को छुआ है।
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अपनी बेटियों के साथ कुसुम दिवाकर
पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंटर कॉलेज, बीजामई (राजकीय मॉडल विद्यालय) की प्रधानाचार्या कुसुम दिवाकर की तपस्या से उनकी बेटियां कुंदन बनी हैं। प्रधानाचार्या पद की जिम्मेदारी का निर्वहन करने के साथ बेटियों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई का पूरा ध्यान रखा। इसकी बदौलत इनकी दोनों बेटियों ने यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की और सरकारी सेवा में हैं। पति बैंक मैनेजर हैं। कुसुम दिवाकर ने बेटियों के लिए काफी संघर्ष किया। उन्होंने बेटियों को मित्र की तरह सलाह दी, साथ बैठकर पढ़ाई की। गुरु की तरह मार्गदर्शन किया।
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बेटी के साथ आईएएस अफसर शुभ्रा सक्सेना
शहर के कवि राजेन्द्र मोहन त्रिपाठी की पंक्तियां एडीए उपाध्यक्ष शुभ्रा सक्सेना पर एकदम सटीक बैठती है। दिल होता है, जां होती है, मां तो आखिर मां होती है। शुभ्रा सक्सेना आईएएस होने के साथ साथ एक मां भी हैं। उनकी पांच वर्ष की एक बेटी शायना है, जो सेंट एथनीज स्कूल में अभी फर्स्ट क्लास में पढ़ती है।
प्रशासन के व्यस्ततम कार्यक्रम के बावजूद शुभ्रा सक्सेना हर रोज अपनी बेटी को खुद स्कूल के लिए तैयार करती हैं। उसके बाद कार्यालय जाती हैं। दिनभर काम करने के बाद शाम को जब घर पहुंचती है तब बेटी की पढ़ाई के साथ-साथ उसकी पसंद का खाना तैयार करती है। एडीए उपाध्यक्ष का कहना है कि बेटी की मुस्कान से ही उन्हें ताकत मिलती है। जिससे घर और ऑफिस में पूरे जोश के साथ काम होता है।
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सुनीता सेन
मां ममता की मूरत ही नहीं, मुसीबत आई तो उसका डटकर मुकाबला भी करना जानती हैं। कमला नगर की सुनीता सेन ने ऐसी ही संघर्ष भरी जिंदगी जी कर बेटे की परवरिश की। 13 साल पहले सड़क दुर्घटना में पति मनोज कुमार की मौत हुई तो उन पर मानो मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। तीन साल का बेटा था, कैसे परवरिश करे और क्या करे, कुछ समझ में नहीं आ रहा। उन्होंने सिलाई कर परिवार चलाने की सोची, फिर क्या सिलाई मशीन खरीदी और शुरू हुई संघर्ष की कहानी।
दिन-रात सिलाई कर पांच-छह हजार रुपये महीने में कमा लेती और इसको बेटे की पढ़ाई में लगा दिया। बेटे ने भी मां के संघर्ष को जाया नहीं जाने दिया। सरस्वती विद्या मंदिर में सीबीएसई की 12वीं परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक पाकर मां को सौगात दी। सुनीता कहती हैं कि मुसीबत में बेटे के भविष्य के लिए उन्होंने अपनी जरूरतों से समझौता किया, लेकिन उसकी परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी।
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मां के साथ शहान अली मोहसिन
रफ्तार के बादशाह के नाम से मशहूर अंतरराष्ट्रीय कार रेसर शहान अली मोहसिन नई ऊंचाइयों को छूने का श्रेय अपनी मां सबिना मोहसिन को देते हैं। उनका कहना है कि पिता शाहरू मोहसिन की व्यवसाय में व्यस्तता के बीच मां सबिना उन्हें उनका टाइम टेबिल फॉलो कराती हैं। साथ ही उनकी प्रैक्टिस का भी ध्यान रखती हैं।
शहान का कहना है कि देश से बाहर किसी इंटरनेशनल चैंपियनशिप में खेलने के लिए जाने से पहले मां ऊपर वाले से मेरी जीत की इबादत करती है। यही कारण है कि मां के मैनेजमेंट के कारण ही यहां तक पहुंच सका हूं। शहान अली मोहसिन 14 साल की उम्र में ही एशियन कार्टिंग चैंपियन बन चुके हैं।
राजनीति में व्यस्त रहने वाले पूर्व विधायक गुटियारी लाल दुबेश के एक्टर पुत्र रविकांत दुबेश अपनी सफलता में मां की अहम भूमिका मानते हैं। एक कुड्डी व्हिसकी एलबम से रातोंरात चर्चा में आए रविकांत ने बताया कि मां ने जिस तरह से करियर बनाने में साथ दिया है, वो दुनिया में कोई अन्य रिश्ता दे ही नहीं सकता है। रविकांत का कहना है कि चूंकि पापा राजनीति में व्यस्त रहते हैं। इस कारण मम्मी से हमेशा बातचीत होती रहती थी। मां ने मुझे यह सिखाया कि जो भी करो, पूरे मन से करो। मां की बदौलत ही वो एक्टर बन पाए हैं।