सिक्किम सड़क हादसे में शहीद हुए एटा के लांस नायक भूपेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। ताबूत खोलते ही पत्नी सारिका गश खाकर गिर पड़ीं। महिलाओं ने उनके मुंह पर पानी के छींटे मारे, एक मिनट बाद होश में आने के बाद चेहरा देखने की कोशिश की और फिर गश खाकर गिर गई। शहीद की बिलखती मां कह रही थी कि बिना पैर छुए कहीं नहीं जाता था। अब आने पर भी लेटा हुआ है।
सिक्किम में शुक्रवार को सेना का वाहन खाई में गिर गया था। हादसे में लांस नायक भूपेंद्र सिंह समेत 16 जवान शहीद हो गए थे। भूपेंद्र सिंह गांव ताजपुर अद्दा के रहने वाले थे। रविवार दोपहर करीब 12 बजे शहीद भूपेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। मां, पिता, पत्नी आदि परिजन शहीद की एक झलक देखने के लिए व्याकुल थे।
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शहीद के घर में मची चीत्कार
- फोटो : अमर उजाला
ताबूत को खोला वैसे ही शहीद के पिता बोले, मेरे बेटे का यह हाल हुआ, जिसकी कभी कल्पना तक नहीं की थी। शहीद की मां एक ही बात कह रही थी लाल उठो, तुमने पैर नहीं छुए। बिना पैर छुए कहीं जाते नहीं थे। अब क्यों नहीं बोल रहे हो। कुछ तो बोलो मेरे लाल। अंत्येष्टि स्थल पर शहीद की मां और पत्नी कई बार गश खाकर गिर पड़ीं।
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शहीद को श्रद्धांजलि देने उमड़े हजारों लोग
- फोटो : अमर उजाला
शहीद लांस नायक के परिजन को प्रशासन द्वारा सहायता धनराशि के चेक उपलब्ध कराए गए। जहां 35 लाख रुपये का चेक शहीद की पत्नी और 15 लाख रुपये का माता-पिता को सौंपा गया। वहीं पत्नी को समूह-ग की नौकरी जल्द दिलाए जाने की बात कही गई।
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शहीद लांस नायक भूपेंद्र सिंह
- फोटो : अमर उजाला
सैनिक कल्याण बोर्ड से कर्नल महेंद्र प्रसाद शहीद भूपेंद्र के घर पहुंच गए। परिजन से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने बताया कि शहीद की पत्नी सारिका सिंह और माता-पिता के खातों में अलग-अलग सहायता राशि पहुंचेगी। कर्नल ने बताया कि शहीद की पत्नी को नौकरी दी जाएगी।
शहीद के पार्थिव शरीर के पास बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
शहीद के पिता सुरेंद्र सिंह ने छोटे बेटे की नौकरी देने की मांग की। उन्होंने बताया कि प्रयास किया जाएगा कि आउटसोर्सिंग से उसे भी नौकरी मिले। शहीद के पिता ने फर्रुखाबाद में नौकरी को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया ।