साल 2019 आगरा को हादसों का दर्द देकर जा रहा है। एक जनवरी से 25 दिसंबर तक 360 दिनों में ही जनपद में 1020 हादसे हुए। इनमें 590 लोगों की जान गई, जबकि 910 घायल हुए। यह हाल तब रहा जब यातायात नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़ा, चालान चार लाख से ज्यादा काटे गए। हाईवे हो या एक्सप्रेसवे, सभी जगह भीषण हादसे हुए। झरना बस हादसे ने तो सबका दिल दहला दिया था।
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8 जुलाई, 2019: झरना नाले पर 'मौत' की झपकी
यमुना एक्सप्रेसवे पर झरना नाला के समीप 8 जुलाई, 2019 को भीषण हादसा हुआ था। झरना नाले के पास ड्राइवर कृपाशंकर को झपकी लगी तो बस पर काबू नहीं रहा। रफ्तार तेज थी इस कारण बस नाले की चार फुट ऊंची रेलिंग पर 20 फुट चढ़कर हवा में झूलती हुई घिसटती चली गई। इसके बाद 40 फुट गहरे झरना नाले में गिर गई। 29 लोगों की मौत हो गई और 27 गंभीर रूप से घायल हुए। नौ अगस्त, 2012 में शुरू हुए यमुना एक्सप्रेसवे पर यह सबसे बड़ा हादसा था।
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11 अप्रैल, 2019: एक्सप्रेसवे पर आठ लोगों की जान हुई मौत
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर फतेहाबाद थाना क्षेत्र के माइल स्टोन 33 पर भीषण सड़क दुर्घटना में आठ लोगों की मौत हुई थी। तेज रफ्तार अर्टिगा कार ट्रक में पीछे से घुस गई थी। हादसे में आजमगढ़ और जौनपुर के आठ लोगों की मौत हो गई थी। सभी डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी कैंपस में साक्षात्कार देने आ रहे थे।
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10 जून, 2019: 30 फुट गहरी खाई में पलटी ट्रैक्टर-टॉली
आगरा-जयपुर हाईवे स्थित महुअर पुल पर रोडवेज बस की टक्कर से एक ट्रैक्टर-ट्रॉली 30 फुट गहरी खाई में पलट गई थी। हादसे में चार महिलाओं की मौत हो गई थी, जबकि 25 से ज्यादा घायल हो गईं थीं।
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28 जून, 2019: मौत का एक्सप्रेसवे, सात लोगों की जान गई
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फतेहाबाद थाना क्षेत्र के नगला लोहिया कट के पास 27वें माइल स्टोन पर सड़क हादसे में सात लोगों की मौत हुई। 46 से अधिक लोग घायल हो गए थे। हादसा बस के बालू लदे ट्रक से टकराने की वजह से हुआ था। अवैध खनन के कारण हाईवे और एक्सप्रेस वे पर बालू लदे ट्रक पूरे साल दौड़ते रहे।
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तीन अगस्त, 2019: गाय को बचाने में चार लोगों ने जान गंवाई
ग्वालियर रोड पर गांव सिकंदरपुर चौराहे के पास सोरों कांवड़ लेने जा रहे ग्रामीणों से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली में पीछे से आते ट्रक ने टक्कर मार दी थी। हादसा सड़क पर बैठी गाय को बचाने के लिए ब्रेक लगाने की वजह से हुआ था। हादसे में चार ग्रामीणों की मौत हो गई थी। इसके बाद भी सड़कों से छुट्टा पशुओं को न हटाया जा सका।
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गुरुद्वारा गुरु का ताल के सामने हाईवे पर कट
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कामयानी पर सात लोगों की जान गई
एनएच-2 के इस ब्लैक स्पॉट पर सबसे ज्यादा हादसे हुए। सात लोगों की जान गई। इनमें तीन फरवरी को बाइक सवार पिता-पुत्र की जान गई थी। इसी से 500 मीटर दूरी पर गुरुद्वारा गुरु का ताल कट पर शिक्षिका समेत पांच लोगों की जान गई। सात जुलाई को बच्चे की किताबें लेकर स्कूटर जा रहे कारोबारी की मौत हो गई थी। इसके बाद बावजूद एनएचएआई ने दोनों जगह संकेतक तक नहीं लगाए। कामयानी कट पर यातायात कर्मियों की तैनाती नहीं की गई।
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खंदौली में तेज रही हादसों की रफ्तार
जिले में थानावार देखें तो सबसे ज्यादा हादसे खंदौली क्षेत्र में है। यहां भी ब्लैक स्पॉट है। खंदौली-सादाबाद रोड पर अप्रैल में कार को ट्रक की टक्कर लगने से अलीगढ़ के पांच लोगों की मौत हुई। एक महीने पहले मथुरा से आए दो बरातियों की मौत हो गई। ये बाइक से जा रहे थे। ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में सिपाही घायल हुआ था।
एसपी ट्रैफिक प्रशांत कुमार ने बताया कि एनएच-2 पर जहां ब्लैक स्पॉट चिह्नित थे, वहां बदलाव किए गए। बोर्ड लगाए जा रहे हैं। लाइटिंग की व्यवस्था की गई। पुलिस कर्मी भी तैनात किए गए हैं। कई जगह फ्लाईओवर भी बनाए गए हैं। वहीं एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने कहा कि सबसे ज्यादा हादसे हाईवे पर होते हैं। हादसे वाले स्थानों पर रोड इंजीनियरिंग में बदलाव किया जाएगा। इसके लिए एनएचएआई के अधिकारियों से बात की जाएगी। रिफलेक्टर और जानकारी वाले बोर्ड लगाए जाएंगे। स्पीडमीटर भी लगाएंगे।