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वेदनाः पुलिस पीटे, भूखे-प्यासे रहें, पांव छिल जाएं...लेकिन घर तो जाना ही है

Tue, 19 May 2020 12:34 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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घर जाने को बसों का इंतजार करते प्रवासी मजदूर - फोटो : अमर उजाला
बदन थकान से चूर, पांव में छाले, मन में पीड़ा और जुबां पर एक ही बात, कैसे भी अपने घर पहुंच जाएं...। मुसीबत के मारे ये मजदूर हैं जो रोटी की खातिर परदेस गए थे। अब रोजी छिन जाने से दाने-दाने को मोहताज होकर वापस घर जा रहे हैं। ठान लिया है कि अब चाहे पुलिस पीटे, भूखे रहना पड़े  या तपती सड़क पर चलते पैर और छिल जाएं लेकिन रुकना नहीं है। बस, ट्रेन, ट्रक जो मिला उसमें बैठ गए और कुछ नहीं मिला तो पैदल ही चल रहे हैं। सबकी अपनी-अपनी कहानी है, अपना-अपना दर्द है। अगली स्लाइड में देखिए मार्मिक तस्वीरें... 
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घर जाने को ट्रेन का इंतजार करते प्रवासी मजदूर - फोटो : अमर उजाला
देवरिया के मजदूर राजकुमार ने बताया कि गुरुग्राम से चले थे तो बस मिली न ट्रेन। पैदल ही निकल गए। 100 किमी. चलने के बाद ट्रक में लिफ्ट मिली। जैसे-तैसे आगरा आए। यहां भी इंतजार किया लेकिन आखिर देवरिया के लिए ट्रेन मिल गई। वहां बस मिल गई तो ठीक, वरना पैदल ही घर पहुंच जाएंगे
 
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घर जाने के लिए निकले प्रवासी मजदूर - फोटो : अमर उजाला
गुरुग्राम से पैदल तो कभी लिफ्ट लेकर आगरा तक पहुंचे गोविंद का इंतजार आईएसबीटी पर लंबा हो गया। पत्नी किरन गर्भवती है। डेढ़ साल की बिटिया भी साथ है। शनिवार की रात को आगरा पहुंचे थे। पुलिस ने खाने के पैकेट, पानी की बोतल तो दे दिए मगर बच्चे को दूध नहीं मिल सका। आईएसबीटी पर प्रयागराज वाली बस जा चुकी थी। तभी से बस का इंतजार कर रहे थे। सोमवार दोपहर को बस मिली। किरन ने बताया कि उन्हें 40 घंटे इंतजार करना पड़ा।

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रेलवे स्टेशन पर साइकिल से पहुंचे मजदूर - फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर निवासी मजदूर विनय सिंह ने बताया कि जयपुर से भूखे-प्यासे चले थे। रास्ते में कहीं खाना नहीं मिला। ट्रक वाले ने 2000 रुपये लिए, थोड़ी दूर बाद छोड़ दिया। जैसे-तैसे आगरा पहुंचे हैं। अब पैसा भी नहीं बचा। ट्रेन मिल गई है। अब घर जाकर मजदूरी करेंगे।
 
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बस का इंतजार करते प्रवासी मजदूर - फोटो : अमर उजाला
पानीपत से आगरा पहुंचे राजेश अपने बीवी, बच्चों के साथ कन्नौज जाने को निकला है। उसने बताया कि रास्ते में पुलिसवाले ने डंडा मारा। दो दिन भूखा रहना पड़ा। अब पुलिस पीटे भले ही रोटी न मिले, हमें तो बस घर लौटना है। नरपत को सोमवार को घर जाने के लिए आखिरकार बस भी मिल गई। 
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घर जाने को बस का इंतजार करते प्रवासी मजदूर - फोटो : अमर उजाला
कोसीकलां से पैदल चलकर आगरा पहुंचे उन्नाव का श्याम बाबू बहुत परेशान था। उसने बताया कि रात में फरह के पास सो गया था। वहां कोई उसका कपड़ों का एक बैग ले गया। जूता पैदल चलने से फट गया। अब वो किसी भी तरह उन्नाव जाना चाहता है। पानीपत में तो कई दिन भूखा रहना पड़ा, लेकिन रास्ते में कई जगह खाना मिला। अब कितने दिन तक बिना पैसे के परदेस में रहते। सरकार को लॉकडाउन से पहले ही उन्हें गांव भेजना चाहिए था, अब तो बहुत देर हो गई है। इतनी जल्दी गांव पहुंचकर भी कोई काम नहीं मिलेगा।
 
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