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कैसे हुई प्रेमानंद के शिष्य की मौत?: धोती पर खून के निशान, छत की ओर जाते दिखे रसिक; सामने आया तीसरा वीडियो

Tue, 06 Oct 2026 02:26 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा

सार

वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। रसिक दुलारी शरण की आत्महत्या से पहले का तीसरा वीडियो सामने आया है। 33 सेकंड के वीडियो में रसिक दुलारी सीढ़ियों से छत की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। उनकी धोती पर खून के निशान नजर आ रहे हैं। 
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Sant Premanand Maharaj - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज से शिष्य 25 वर्षीय दीपक उर्फ रसिक दुलारी शरण की आत्महत्या से पहले का तीसरा वीडियो सामने आया है। 33 सेकंड के वीडियो में रसिक दुलारी सीढ़ियों से छत की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। उनकी धोती पर खून के निशान नजर आ रहे हैं। 
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वीडियो ने उनकी मौत से पहले की परिस्थितियों पर जांच के सवाल और बढ़ा दिए हैं। रसिक दुलारी ने 25 सितंबर की सुबह गऊ कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। 26 सितंबर को यमुना किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया। 
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घटना के दो दिन बाद उनका चौथी मंजिल से कूदने का सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। इसके बाद दूसरे वीडियो में वह छत की बाउंड्री पर बैठे और करीब छह सेकेंड बाद फर्श पर लेटते दिखे। फिर अचानक उठकर छलांग लगा देते हैं। 

 

आत्महत्या और प्राइवेट पार्ट काटने के रहस्य से पर्दा उठाने के लिए पुलिस आश्रम से जुड़े और आसपास रहने वाले 200 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। पुलिस ने रसिक दुलारी का मोबाइल फोन और एनल स्लाइड जांच के लिए भेजी हैं। 

 

एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि आत्महत्या के रहस्य से पर्दा उठाने के लिए पुलिस लगातार लोगों से पूछताछ कर रही है। मोबाइल की कॉल डिटेल भी खंगाली गई है। अब फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।


आश्रम में पुलिस की नो एंट्री, संत भी कब्जे में
संत प्रेमानंद के 25 वर्षीय शिष्य दीपक लोधी उर्फ दुलारी शरण की आत्महत्या से पर्दा उठाने में जुटी पुलिस आश्रम तक नहीं पहुंच पा रही है। एक चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में एक पुलिसकर्मी कहता हुआ नजर आ रहा है कि आश्रम में पुलिस का जाना प्रतिबंधित है। उसका यह भी कहना है संत प्रेमानंद को भी कुछ शिष्यों ने कब्जे में कर रखा है।
 

25 सितंबर को गऊ कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से दीपक लोधी ने छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसका प्राइवेट पार्ट कटा होने और परिजन की तहरीर पर पुलिस ने जांच शुरू की। माैत के 11वें दिन बाद भी पुलिस आत्महत्या के पीछे के राजदार को सामने नहीं ला पा रही है। 

 

इसका सबसे बड़ा कारण पुलिस को आश्रम में जाने से रोका जा रहा है। इस बात का खुलासा एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ। यहां एक पुलिसकर्मी ने आश्रम में पुलिस के प्रवेश नहीं होने की बात कही। इसके अलावा उसका कहना है कि संत को भी शिष्यों ने कब्जे में कर रखा है।

 

इस संबंध में एसएसपी श्लोक कुमार का कहना है कि पुलिस ने गऊ कृपा कुंज आश्रम से सीसीटीवी फुटेज हासिल की है। वहां जाकर लोगों से पूछताछ की जा रही है। संत प्रेमानंद किसी के कब्जे में नहीं हैं, उनका स्वास्थ्य खराब रहता है। इसलिए वह किसी से नहीं मिल रहे हैं।

एससी/एसटी आयोग सख्त
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। घटना के 10 दिन बाद उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है। सोमवार को आयोग की सदस्य नीरज गौतम मथुरा पहुंचीं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली।

 

आयोग की सदस्य नीरज गौतम ने पुलिस को मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। 

 

बैठक के दौरान नीरज गौतम ने सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे नए-नए सीसीटीवी फुटेज को लेकर मथुरा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारियों से सीधे तौर पर पूछा कि जब घटना के तुरंत बाद सीसीटीवी का डीवीआर पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया था, तो इसके फुटेज बाहर कैसे आ रहे हैं। 

 

उन्होंने इसे जांच और साक्ष्यों की सुरक्षा में बड़ी चूक मानते हुए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करने के आदेश दिए। गौरतलब है कि बीती 25 सितंबर को रसिक दुलारी शरण की चार मंजिला इमारत से गिरकर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। 

 
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इतने दिन बीत जाने के बाद भी मुकदमा दर्ज न होने और लगातार साक्ष्य लीक होने से पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि आयोग के सख्त रुख के बाद पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है।
 
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