सब जग होरी जा ब्रज होरा। ब्रज के राजा बलदेव (दाऊजी) के आंगन में हुरंगा की अनूठी परंपरा ब्रज में मनाए जा रहे होली उत्सव को शिखर का स्पर्श कराती है।
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गोपियों ने बरसाए कोड़े
- फोटो : अमर उजाला
अबीर, गुलाल और रंग के बीच यहां हुरियारिनें कपड़ों के कोड़े बनाकर हुरियारों पर तड़ातड़ बरसाती हैं। इस अनूठे प्रेम की परंपरा को देखने के लिए देश और विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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देशभर से आए साधुओं ने हुरंगा का आनंद लिया
- फोटो : अमर उजाला
भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ की नगरी बलदेव में शनिवार को हुरंगा का आयोजन किया गया। ब्रज की होली अन्य आयोजन भगवान श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम पर केंद्रित हैं तो दाऊजी के हुरंगा का मुख्य आकर्षण हैं श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलदेव। गोस्वामी श्रीकल्याणदेव जी के वंशज सेवायत पांडेय समाज के स्त्री पुरुष बच्चे ही हुरंगा खेलते हैं।
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हुरंगा का लिया आनंद
- फोटो : अमर उजाला
दाऊजी मंदिर परिसर में हुरंगा के दौरान गोपिका स्वरूप महिलाओं ने गोप स्वरूप पुरुषों के कपड़ों को फाड़कर उसके कोड़े बनाए और नंगे बदन पर बरसाती रहीं। यह अद्भुत दृश्य देखने के लिए लाखों श्रद्धालु और ब्रज के संत-महंत पहुंचे।
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जमकर खेली होली
- फोटो : अमर उजाला
हुरंगा खेलने के लिए ब्रज की गोपिका स्वरूप महिलाएं परंपरागत वस्त्र लहंगा फरिया और आभूषण आदि पहन कर अपने झुंड के साथ विभिन्न द्वारों से मंदिर में होली गीत गाते पहुंचीं। यहां ब्रज के गोप स्वरूप पुरुषों ने अपनी-अपनी बगीचियों पर भांग का भोग अपने अराध्य दाऊजी महाराज को लगाकर मंदिर आंगन में प्रवेश किया।
प्रात: से ही मंदिर की छतों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था। ‘नंद के तो ते होरी जब खेलू मेरी पोहचीं में नग जड़वाय’ जैसे होली गीतों ने मन को आनंदित कर दिया। मंदिर के पट खुलते ही दाऊजी महाराज ने अलबेले छैल छिकनियां स्वरूप में दर्शन दिए। हुरंगा खेलने वाली महिलाओं ने भी नहीं देखा कि उनके सामने जेठ हैं या ससुर। ब्रज में कहावत है फागुन में जेठ कहे भाभी।