आयुषी की हत्या के बाद उसके पिता नितेश यादव को तनिक भी अफसोस नहीं था। वह शराब पीकर एमसीडी के चुनाव प्रचार में घूमाता रहा। 20 नवंबर को मथुरा पुलिस जब आयुषी के दिल्ली के बदरपुर स्थित घर पहुंची तो हत्यारोपी पिता नितेश यादव घर पर नहीं मिला था। इसी दिन स्वॉट टीम ने उसे एक राजनीतिक दल के चुनाव कार्यालय से उठाया था। नशे में धुत हत्यारोपी को पकड़कर स्वॉट टीम शव की पहचान के लिए मथुरा लेकर चली तो रास्ते में पूछताछ के दौरान ही उसने बीयर पीने की शर्त रख दी। पुलिस ने उसकी इच्छा पूरी की, फिर भी वह पुलिस को गुमराह करता रहा। आखिरकार देर रात तकरीबन 11.30 पुलिस ने सख्ती बरती तो वह टूट गया। उसने आयुषी की हत्या करना स्वीकार कर लिया। नितेश के नशे में धुत होने के कारण ही पुलिस ने उसे अलग गाड़ी में बैठाया और मां, भाई को दूसरी गाड़ी से पहचान के लिए पोस्टमार्टम गृह तक पहुंची थी। इस बीच मांट टोल चौकी पर नितेश को बैठाया गया।