बहादुर बेटे ने पिता से फोन पर कहा था कि छुट्टी मंजूर होते ही जल्द घर आ जाऊंगा। बेटे के आने की खुशी में खुशी का माहौल था। लेकिन कौन जानता था कि उसके आने से पहले शहादत की खबर आ जाएगी। शनिवार को शहीद जवान का पार्थिव शरीर गांव लाया गया। जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए कोसीकलां के लाल रामवीर बेनीवाल की शहादत पर लोगों को गर्व है और गम भी।
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शहीद के अंतिम दर्शन को उमड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
सुबह से ही शहीद के अंतिम दर्शन करने के लिए गांव हुलवाना में लोगों के आने का सिलसिला जारी था। कोसीकलां से गांव हुलवाना तक भारत माता के नारे गूंज रहे थे। युवा हाथों में तिरंगा लेकर शहीद के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही शहीद रामवीर का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, भारत माता के जयकारे और जब तब सूरज चांद रहेगा, तब तब रामवीर का नाम रहेगा, जैसे नारे गूंजने लगे।
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शहीद जवान का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
तिरंगे में लिपटे शहीद रामवीर सिंह को देखकर मां कृष्णा और पत्नी नीतू का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार की महिलाओं ने इन दोनों को हिम्मत बंधाई लेकिन जिसका अपना चला जाए उसे भला कौन संभाल सकता है। रामवीर सिंह की शादी वर्ष 2012 में छाता निवासी नीतू के साथ हुई थी। इनके दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा तीन साल का शिवा है और छह माह का आदित्य है।
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शहीद रामवीर का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पिता किशोर सिंह के भी आंसू नहीं थम रहे हैं। पिता को रामवीर सिंह ने बुधवार को फोन किया था। कहा था कि 15 दिन की छुट्टी मंजूर करा रहा हूं। एप्लीकेशन दे दी है। छुट्टी मंजूर होते ही घर आ जाऊंगा। किशोर सिंह ने कहा कि बड़ा खुश था उनका बेटा। कह रहा था कि छुट्टी में घूमने भी चलेंगे। लेकिन कौन जानता था कि उसके आने से पहले शहादत की खबर आ जाएगी।
शहीद रामवीर सिंह के पिता किशोर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
कोसीकलां क्षेत्र के गांव हुलवाना निवासी किशोर सिंह के बेटे रामवीर सिंह से अक्सर फोन पर बात होती रहती थी। इसी बुधवार की रात को काफी देर किशन सिंह ने अपने बेटे रामवीर सिंह से बात की थी। उसने कहा कि वो जल्द ही घर आएगा। शुक्रवार की भोर में पता चला कि उनका बेटा शहीद हो गया है। जिसने भी सुना वही किशन सिंह के घर पहुंच गया।