ताजनगरी में पर्यटन को बढ़ावा देने की लाख कोशिशें हुईं, लेकिन परवान नहीं चढ़ सकी हैं। यहां तक कि पर्यटन सीजन में भी पर्यटकों का ग्राफ गिरा है। रात्रि प्रवास बढ़ाने के लिए महताब बाग के नजदीक ग्यारह सीढ़ी पर ताज के रात्रि दर्शन की शुरुआत की गई, लेकिन यह भी फ्लॉप हो गई।
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आगरा किला पर पर्यटक
- फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी में बजट क्लास से लेकर पांच सितारा होटलों की शृंखला और ताजमहल के साथ ही आगरा किला, एत्माद्दौला, फतेहपुर सीकरी जैसे ऐतिहासिक स्मारकों के बाद भी पर्यटकों की संख्या में कमी आ रही है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शहर में नाइट कल्चर को बढ़ावा देने की कवायदें भी सिरे नहीं चढ़ सकी हैं।
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आगरा किला में लाइट एंड साउंड शो के दौरान की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
हेरिटेज वॉक और सदर बाजार में नियमित रूप से रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजनाएं तमाम बार बनीं, लेकिन सफल नहीं हो सकीं। फतेहपुर सीकरी में लाइट एंड साउंड शो आयोजित किया जाना था, लेकिन अभी तक शुरुआत नहीं हो सकी है।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ताजमहल पर ही टूरिस्ट सीजन में पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर व्यवस्थाएं नहीं कर पाता है। पर्यटकों की सहूलियत के लिए टर्न स्टाइल गेट लगवाए गए, लेकिन वीकेंड पर 30 हजार से ज्यादा पर्यटकों के उमड़ने पर दोनों गेटों पर पर्यटकों को ताज में प्रवेश के लिए दो-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में पर्यटक ताजमहल, आगरा किला व फतेहपुर सीकरी के टूर के बाद आगरा से दिल्ली की राह पकड़ लेता है।
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ताजमहल
पर्यटन विभाग की ओर से ताजमहल के नजदीक शिल्पग्राम में 18 से 22 फरवरी तक हर साल ताज महोत्सव का आयोजन किया जाता है, लेकिन इस महोत्सव में भी विदेशी पर्यटकों की संख्या नगण्य ही रहती है।
पर्यटन उद्यमी संदीप अरोरा ने बताया कि आगरा में नाइट स्टे बढ़ाने के लिए लंबे समय से कवायद की जा रही है, लेकिन आज तक कोई स्थायी सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू नहीं किया जा सका है और न ही स्मारकों में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल पा रही हैं। ऐसे में पर्यटक एक दिन में ही आगरा घूमकर चला जाता है।