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पांच महीने बाद सऊदी अरब की 'कैद' से आजाद हुआ आनंद, वतन वापसी होने पर बताई आपबीती

Sat, 17 Aug 2019 01:04 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
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घर वापस आने पर बेटे को प्यार करता आनंद - फोटो : अमर उजाला
सऊदी अरब में नौकरी के लिए गए आनंद की वतन वापसी हो चुकी है। पांच महीने बाद घर पहुंचे आनंद का परिजनों ने नम आंखों से अभिनंदन किया। बेटे को कलेजे से लगाकर मां फफक पड़ी। गांव वालों ने भी फूल माला पहनाकर स्वागत किया। जब आनंद ने आपबीती बताई तो लोग सिहर गए। आनंद ने कहा कि वो देश में मेहनत-मजदूरी कर लेगा, लेकिन नौकरी को विदेश नहीं जाएगा। 
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मैनपुरी के युवकों ने सऊदी अरब से वीडियो भेजकर मांगी मदद - फोटो : वीडियो से ली गई तस्वीर
गांव बिरतिया निवासी 30 वर्षीय आनंद बाथम नौकरी के लिए 17 मार्च को सऊदी अरब गए थे। यहां रियाद शहर में उसे एक केमिकल फैक्टरी में नौकरी मिली, लेकिन उसे वेतन नहीं दिया गया। बार-बार वेतन मांगने पर फैक्टरी मालिक ने वीजा सहित अन्य कागजात छीन लिए और बंधक बनाकर काम करने को मजबूर कर दिया। 28 जुलाई को आनंद ने पत्नी के मोबाइल पर वीडियो बनाकर भेजा। इसमें उसने खुद के साथ ही उत्तर प्रदेश के छह युवकों को बंधक बनाए जाने की जानकारी दी। 
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पत्नी ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर लगाई गुहार - फोटो : अमर उजाला
परिजनों से जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन युवक की वतन वापसी कराने के प्रयास में जुट गया था। जिलाधिकारी ने विदेश मंत्रालय के साथ ही भारतीय दूतावास से संपर्क किया। साथ ही एसपी ने तीन एजेंटों के खिलाफ एलाऊ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मुंबई तक फ्लाइट से पहुंचने के बाद आनंद कानपुर तक ट्रेन से पहुंचा। यहां से वो शुक्रवार दोपहर घर पहुंचा। 

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परिवार के साथ आनंद - फोटो : अमर उजाला
आनंद के उत्पीडन की दास्तां सुनकर परिजन चिंता में डूबे हुए थे। शुक्रवार दोपहर आनंद जैसे ही घर पहुंचा तो पत्नी रानी सहित अन्य परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। वृद्ध मां हंसमुखी बेटे को कलेजे से लगाकर फफक पड़ी। बूढ़ी मां ने जवान बेटे को हिदायत दी, जो भी काम करना है यहीं करो, अब घर से दूर जाने की जरूरत नहीं है। 
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वीडियो भेज लगाई थी गुहार - फोटो : अमर उजाला
आनंद ने परिजनों को विदेश में हुए उत्पीड़न के बारे में बताया। आनंद ने कहा कि अपने देश में कदम रखते ही वो खुद का आजाद महसूस कर रहा था। सऊदी अरब में हर समय उसे जान का खतरा सताता था। अगर शासन, प्रशासन और मीडिया उसके साथ न होते तो शायद वतन वापसी होना मुश्किल था। उसने बताया कि उसे तीन साल का वीजा दिलाने का आश्वासन मिला था। बाद में पता चला कि वीजा सिर्फ 90 दिन का ही था। आनंद ने कहा कि वो अपने देश में मेहनत मजदूरी कर लेगा, लेकिन अब कभी नौकरी के लिए विदेश नहीं जाएगा। 
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सऊदी अरब से वीडियो भेजकर लगाई थी गुहार - फोटो : अमर उजाला
घर पहुंचे आनंद ने बताया कि विदेश भेजने वाले दलाल पहले ही वहां की कंपनियों से लेबर मुहैया कराने के बदले में मोटी रकम वसूल लेते हैं। बाद में जो युवक वहां नौकरी के लिए पहुंचते हैं, उनका उत्पीड़न होता है। अभी भी बिजनौर और गोरखपुर के 10 युवक वहां बंधक हैं। आनंद ने बताया कि उसके साथ फतेहपुर के मुकेश तिवारी, बलरामपुर के रजबुद्दीन, उन्नाव के राहुल सक्सेना, सचिन और प्रमोद सक्सेना की वतन वापसी हुई है।
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