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Mainpuri By-Election 2022: मैनपुरी में डिंपल की जीत नहीं आसान, ये वजह कर सकती है अखिलेश यादव को भी परेशान

Sat, 12 Nov 2022 06:55 PM IST
धीरेन्द्र सिंह नीलेश शर्मा, मैनपुरी
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अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव - फोटो : Facebook/Dimple Yadav
समाजवादी पार्टी के गढ़ मैनपुरी में चुनावी शंखनाद हो गया है। सपा ने चुनाव मैदान में नेताजी मुलायम सिंह यादव की बहू डिंपल यादव को उतारा है। सपा भले ही मैनपुरी सीट को सुरक्षित मान रही है, लेकिन धरतीपुत्र की जमीं पर बहू डिंपल यादव की चुनावी राह आसान नहीं है। पिछले चुनावों में इस लोकसभा सीट पर जीत का अंतर सपा मुखिया अखिलेश यादव को भी परेशान कर रहा है। पिछले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की मजबूती ने मुलायम सिंह यादव की जीत का अंतर लाखों से हजारों में समेट दिया। ऐसा तब हुआ जब आम चुनाव में सपा को बसपा का साथ मिला था। कुल मिलाकर यह चुनाव दिलचस्प होगा। दोनों ही दल जीत के लिए जोरआजमाइश करेंगे। 

सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी लोकसभा सीट खाली हुई है। इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। पांच दिसंबर को मतदान होगा। समाजवादी पार्टी ने मुलायम की बहू व सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को टिकट दिया है। सपा मुलायम की विरासत वाली सीट को हासिल करके लोकसभा में अपनी उपस्थिति बनाए रखना चाहती है। वहीं भाजपा भी पूरे दमखम से मैदान में है। भाजपा सपा का गढ़ ढहाने चाहती है। उपचुनाव में सीधे-सीधे मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही है। 
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अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव - फोटो : Facebook/The Best Cm of Up Akhilesh Yadav
भाजपा की मजबूती ने सपा की राह मुश्किल बना दी है। वर्ष 2004 में हुए आम चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने 3.37 लाख वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। वर्ष 2019 के आम चुनाव में नेताजी की जीत सिर्फ 94 हजार वोटों से ही हुई। सपा की जीत का अंतर ऐसे वक्त में घटा, जब सपा और बसपा गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ा था। 
 
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डिंपल यादव, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव - फोटो : फाइल फोटो
सपा को 2019 के लोकसभा चुनाव से सीख लेनी चाहिए, क्यों हो सकता है कि मतदाता का मन आज भी आम चुनाव जैसा ही हो। उपचुनाव में सपा के साथ बसपा नहीं है। ऐसे में बसपा वोट में सेंध लगाकर भाजपा बाजी पलट भी सकती है।

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बीजेपी पार्टी। - फोटो : amar ujala

भाजपा ने 2019 में दी थी टक्कर

संगठन विस्तार के साथ ही भाजपा आज मजबूत स्थिति में है। संगठन की मजबूती के दम पर ही भाजपा ने 2019 का लोकसभा चुनाव पूरी दमदारी के साथ लड़ा। सपा की ओर से चुनाव मैदान में खुद मुलायम सिंह यादव थे, वहीं भाजपा ने स्थानीय प्रत्याशी प्रेम सिंह शाक्य पर दांव लगाया था। इस चुनाव में मुलायम सिंह यादव को 5,24,926 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य 4,30,547 ने वोट हासिल किए थे। मुलायम सिंह जैसा बड़ा चेहरा सिर्फ 94389 वोटों से ही जीता। 
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अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

सपा ने कब कितने वोटों से जीता चुनाव

वर्ष        प्रत्याशी                  कुल मिले वोट           जीत का अंतर
1996    मुलायम सिंह यादव        273303             51958
1998    बलराम सिंह यादव        264734             10366    
1999    बलराम सिंह यादव        244113             28026
2004    मुलायम सिंह यादव       460470              337870
2004    धर्मेंद्र यादव उपचुनाव     348999             179713
2009    मुलायम सिंह यादव         392308             173069
2014    मुलायम सिंह यादव         595918             364666
2014   तेजप्रताप यादव उपचुनाव  653786              321249
2019   मुलायम सिंह यादव         524926             94389
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