मैनपुरी लोकसभा चुनाव में विकास नहीं जातिवाद का मुद्दा हमेशा हावी रहा है। जिले के जाति बाहुल्य चार क्षेत्र हर चुनाव में अपनी प्रभावी भूमिका निभाते चले आ रहे हैं। प्रत्याशियों का इन क्षेत्रों में सेंधमारी करने के साथ ही बढ़त बनाने को हर बार जोर रहता है। इन क्षेत्रों के बारे में आमतौर पर कहा भी जाता है, जिसकी उठी आवाज उसको मिला ताज।
जिले के अलग-अलग स्थानों पर चार क्षेत्र ऐसे हैं जहां एक विशेष जाति का बाहुल्य है। यह क्षेत्र हर चुनाव में प्रत्याशियों के निशाने पर रहते हैं। यादव और ठाकुर बाहुल्य इन क्षेत्रों में सेंधमारी करने की हर चुनाव में कोशिश की जाती है। सेंधमारी करके वोट हासिल करने के लिए प्रत्याशी जी जान लगा देते हैं। हर चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के सजातीय नेताओं की सभाएं प्रत्याशियों के समर्थन में कराकर प्रमुख पार्टियां चुनावी माहौल बनाती हैं। बुजुर्ग लोग बताते हैं इन क्षेत्रों का रुझान रातों रात बदल भी जाता है। इन क्षेत्रों के अधिकांश मतदाता एकजुट होकर मतदान करते रहे हैं। सजातीय प्रत्याशी हमेशा से उनकी पहली पसंद रहे हैं। जाति बाहुल्य चार क्षेत्रों के लगभग 70 हजार मतदाता चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के साथ ही प्रत्याशियों का चुनावी माहौल बनाने में हमेशा मददगार साबित हुए हैं।
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
सपा ने हमेशा की सेंधमारी
ठाकुर बाहुल्य तीन क्षेत्रों में मतदाताओं का रुझान आमतौर पर सजातीय प्रत्याशियों के साथ रहता है। विकास से कोसों दूर जातिवाद और भाजपा के नाम पर मतदान करने वाले इन क्षेत्रों में सपा ने न केवल सेंधमारी की है बल्कि अधिकांश मतदाताओं का समर्थन भी हासिल किया है।
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भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव
- फोटो : सोशल मीडिया
भाजपा को भी मिली सफलता
लोकसभा चुनाव 2019 में यादव बाहुल्य क्षेत्र बन्नदल में भाजपा को सेंधमारी में सफलता मिली थी। सांसद हरनाथ सिंह यादव का क्षेत्र होने के कारण भाजपा को इस क्षेत्र में उम्मीद के मुताबिक वोट भी मिले थे। इस बार बन्नदल क्षेत्र के कई नेता भाजपा की पतवार उठाए हुए हैं।
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मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव
- फोटो : अमर उजाला
क्षेत्र शामिल गांव मतदाता
बन्नदल यादव बाहुल्य बारह 17000
चौघरा ठाकुर बाहुल्य ग्यारह 16000
पतारा ठाकुर बाहुल्य बाईस 19000
पंचवटी ठाकुर बाहुल्य अठारह 18000
नोट- मतदाताओं की संख्या लगभग है।
कार्यक्रम को संबोधित करते डॉ. सुमंत गुप्ता (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
साहित्यकार श्रीकृष्ण मिश्र ने बताया कि चुनाव के दौरान अब मतदाता विकास की नहीं जाति की बात करते हैं। विकास का मुद्दा हर चुनाव में पीछे छूट जाता है। सजातीय प्रत्याशियों की मदद करने के साथ ही इन क्षेत्रों के मतदाता सेंधमारी का शिकार होते चले आ रहे हैं। वहीं वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमंत गुप्ता ने बताया कि जिले की राजनीति को जातिवाद ने दूषित कर दिया है। लंबे समय से राजनीतिक दल जाति आधारित प्रत्याशी मैदान में उतारते रहे हैं। परिसीमन के बाद हालात बदल गए हैं। अब जिले में विकास आधारित राजनीति होनी चाहिए।
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