Jiमहाशिवरात्रि पर्व से पहले पूरा वातावरण शिवमय हो गया है। चहुंओर श्रद्धा के सैलाब की आस्था उमड़ पड़ी। लहरा गंगाघाट से लेकर शहर की सड़कों तक सिर्फ जत्थे ही जत्थे नजर आ रहे थे। कांवडिय़ों की कतार एक क्षण भी नहीं टूट रही। तीर्थनगरी और गंगाघाट का नजारा केसरिया हो गया है। सुरक्षा के लिहाज से जगह जगह पुलिसबल तैनात किया गया। एक ओर कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए पुलिस कदम-कदम पर नजर रखेगी। वहीं गंगा में आस्था की डुबकी की निगरानी के लिए भी पुलिस ने योजना बना ली है। जिसके तहत लहरा घाट पर वॉच टावर बनाए जा रहे हैं। जिनपर पुलिस के जवान तैनात रहेंगे। पूर्व में हुई घटनाओं के मद्देनजर पुलिस ने इस बार यह कदम उठाया है।
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लहरा घाट पर पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि के पर्व पर घाटों पर हजारों श्रद्धालु उमड़ेंगे। पूर्व में गंगा घाटों पर स्नान के दौरान कई बार श्रद्धालुओं के डूबने की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में पुलिस स्नान करने वाले स्थान पर भी विशेष निगरानी करेगी। पुलिस ने पीएसी की फ्लड यूनिट तैनात कर दी है। ताकि कोई श्रद्धालु स्नान के दौरान गहरे पानी में न जा सके। लहरा घाट पर बने वॉच टावरों से पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर नजर रखेंगे। जिससे कोई अप्रिय घटना होने पर आसानी से रेस्क्यू किया जा सके।
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कांवड़ ले जाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
सुबह गंगाघाट पर शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। घाट पर सिर्फ श्रद्धालु ही श्रद्धालु नजर आ रहे थे। श्रद्धालुओं की जितनी भीड़ जल लेकर घाट से मुख्य सड़क की ओर आ रही थी। उससे कई गुना ज्यादा भीड़ गंगाघाट की ओर बढ़ रही थी। कांवड़ भरकर श्रद्धालु पैदल लौट रहे थे जबकि जाने वाले श्रद्धालु वाहनों से पहुंच रहे थे। श्रद्धालुओं की भीड़ इस कदर उमड़ी कि वाहन खड़ा करना तो दूर, घाट तक पहुंचना ही मुश्किल था।
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कांवड़
- फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालुओं ने गंगाघाट से लगभग 6 से 7 किलोमीटर दूरी पर वाहन खड़े किए। घाट पर जिस तरफ भी नजर गई सिर्फ आस्था में डूबे शिवभक्त नजर आ रहे थे। घाट के बाद जब शिवभक्तों की भीड़ सड़क पर उमड़ने लगी तो दोपहर तक सिर्फ जत्थे ही जत्थे नजर आ रहे थे। हाथों में कांवड़, साथ चल रहे वाहनों पर लगे डीजे पर बजते भोले के गीत शिवभक्तों को आनंदित कर रहे थे। जोश और उत्साह में शिवभक्त बम बम भोले की जयकार कर रहे थे। शिवभक्तों के जयकारों से घाट और तीर्थनगरी ही नहीं बल्कि मुख्य सड़कों के अलावा शहर की गलियां और बाजार भी गूंज उठे।
शिवभक्त कांवड़िये अपनी अपनी कांवड़ को आकर्षक बनाने के लिए तरह तरह से साज सज्जा करते रहे। कांवड़ियों ने तीर्थनगरी सोरों से कांवड़ की साज सज्जा का सामान खरीदा और फिर लहरा गंगाघाट पर गंगाजल भरने से पहले कांवड़ को दुल्हन की तरह सजाकर आकर्षक बना दिया। गंगाघाट पर पहुंचने वाले श्रद्धालु केसरिया परिधान में थे। तब तक तो घाट केसरिया रंग में रंगा नजर आया और जैसे ही विधि विधानपूर्वक श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा अर्चना की और कांवड़ को सजाया और सड़कों की ओर चल पड़े। इस दौरान तरह तरह के रंगों से सजी कांवड़ से सड़कों का नजारा सतरंगी हो गया।