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ब्रज से आसान नहीं दिल्ली का रास्ता, सामने होगा पहाड़ जैसा वोटों का अंतर, होगी कांटे की टक्कर

Tue, 19 Mar 2019 02:56 PM IST
मुकेश कुमार चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
ब्रज में चुनावी परीक्षा शुरु हो चुकी है। एक तरफ राष्ट्रवाद के रथ पर सवार भाजपा के महारथी हैं तो दूसरी और गठबंधन का गणित लेकर उत्साह से भरे   उम्मीदवार हैं। चुनौती दोनों के सामने हैं। पिछले चुनाव का नतीजा देखें तो जीत का अंतर बहुत ज्यादा रहा था। चाहें भाजपा के प्रत्याशी हों या सपा के, सभी एक लाख से ज्यादा वोटों से जीते थे। इस बार सबसे बड़ी चुनौती इस अंतर को पार करने की है। देखते हैं किसमें कितना है दम...
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सपा-बसपा - फोटो : अमर उजाला
गठबंधन की उम्मीद : वोटों का बिखराव नहीं होगा
गठबंधन को फायदा यह रहेगा कि भाजपा विरोधी वोटों का बिखराव नहीं होगा। सपा, बसपा, रालोद से एक ही उम्मीदवार होगा। मैनपुरी, फिरोजाबाद में तो कांग्रेस का उम्मीदवार भी नहीं होगा। ऐसे में अगर गठबंधन में शामिल और समर्थन देने वाले दलों के वोटरों के वोट जुड़ते हैं तो चुनावी परीक्षा पास की जा सकती है। मथुरा और सीकरी में रालोद का अच्छा प्रभाव रहा है। आगरा, फतेहपुर सीकरी में बसपा का परंपरागत वोट ज्यादा है। फिरोजाबाद, एटा और मैनपुरी भाजपा के गढ़ रहे हैं। अगर सभी का वोट मिलेगा तो चुनावी किला फतह करना मुश्किल नहीं है। सैफई परिवार के दो उम्मीदवार यहां मैदान में आ चुके हैं।
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भाजपा का झंडा
भाजपा की उम्मीद : विरोधी दलों के वोटबैंक में लगेगी सेंध
भाजपा को उम्मीद है कि जहां सपा का उम्मीदवार है, वहां बसपा के वोटबैंक में आसानी से सेंधमारी हो जाएगी। बसपा के वोटरों के मन में यह सवाल रहेगा कि साइकिल का बटन दबाएं या नहीं। इसी तरह जहां बसपा के उम्मीदवार हैं, वहां से सपा केवोट में सेंधमारी हो सकती है। फार्मूला विधान सभा चुनाव का अपनाया जाएगा। रणनीति बनी है 51 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करने की। फिरोजाबाद और मैनपुरी में कांग्रेस के उम्मीदवार नहीं होंगे तो भाजपा के रणनीतिकार चाहेंगे कि उसका वोट कमल के फूल को मिल जाए। जैसे 2017 में सपा और बसपा के वोटबैंक में सेंध लगाई थी, वैसे ही इस बार लगाई जाए। इन दलों के बागियों को भी साथ में लिया जा रहा है।

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पिछले चुनाव के विजयी प्रत्याशी - फोटो : अमर उजाला
पहाड़ जैसा है वोट का अंतर
- आगरा: 300263 वोट से भाजपा के रामशंकर कठेरिया जीते थे। बसपा के नारायण सिंह सुमन दूसरे स्थान पर रहे।
- फतेहपुर सीकरी : 173706 वोट से भाजपा के चौधरी बाबूलाल वोटों से जीते थे। बसपा की सीमा उपाध्याय दूसरे स्थान पर रहीं।
- मथुरा :  330743 वोट से जीती थीं भाजपा की हेमा मालिनी। रालोद के जयंत चौधरी थे दूसरे स्थान पर।
- मैनपुरी : 321249 वोट मुलायम सिंह यादव से जीते थे सपा के मुलायम सिंह यादव। भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य दूसरे स्थान पर थे।
- एटा : 201001 वोट से जीते थे भाजपा के राजवीर सिंह। सपा के देवेंद्र सिंह यादव थे दूसरे स्थान पर।
- फिरोजाबाद : 114059 वोट से जीते थे सपा के अक्षय यादव। भाजपा के प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल दूसरे स्थान पर रहे थे।
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अखिलेश यादव, मायावती और अजित सिंह
गठबंधन का चक्रव्यूह
- मायावती, अखिलेश, अजित सिंह की संयुक्त रैलियों से तीनों के परंपरागत वोटरों को जोड़ा जाएगा।
- मैनपुरी में मायावती की रैली से संदेश दिया जाएगा कि सपा से पुरानी कड़वाहट को वह भूल चुकी हैं।
- पानी की समस्या दूर न होने, हवाई अड्डा न बनने जैसे मुद्दों को उछालकर भाजपा का खेल बिगाड़ने की कोशिश होगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
भाजपा के तरकश में तीर 
- सपा, बसपा, कांग्रेस के नेताओं को अपनी ओर किया जाएगा। काम शुरु हो चुका है।
- यादव, अनुसूचित जाति और जाट नेताओं को ब्रज में बड़ी संख्या में उतारा जाएगा।
- सोशल मीडिया पर गेस्ट हाउस कांड को उछाला जाएगा, ताकि सपा और बसपा के वोटरों में दूरियां बनी रहें।
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शिवपाल सिंह यादव
किसका कल्याण करेंगे शिवपाल ?
शिवपाल यादव की रणनीति अभी तक पूरी तरह से साफ नहीं है। वह किसके साथ गठबंधन करेंगे? कौन कौन सी सीट पर उम्मीदवार उतारेंगे। वह खुद फिरोजाबाद से चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं। देखना यह है कि उनके मैदान में आने से किसे नुकसान होगा और किसे फायदा? भाजपाई चाहते हैं कि शिवपाल पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरें। भाजपाइयों की उम्मीद है कि शिवपाल की प्रसपा गठबंधन को ही नुकसान पहुंचाएगी।
 
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लोकतंत्र का महापर्व - फोटो : अमर उजाला
न लहर, न हवा कैसे मिलेगी जीत ? 
पिछले चुनाव में मोदी लहर थी। भाजपा को दिक्कत नहीं आई। इस बार ब्रज में अभी तक किसी की लहर नहीं है। गठबंधन की परफोरमेंस इस पर भी निर्भर करेगी कि मुलायम का रुख कैसा रहता है? ब्रज में अभी तक कोई ऐसा मुद्दा भी नहीं उठा है जिस पर चुनाव फोकस होने जा रहा हो। ऐसे में चुनौतियां सबके सामने हैं। देखना है कि कौन कैसे निपटता है। 
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